सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
नई दिल्ली। भारत, मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड के विजन के साथ, रेलवे उपकरणों के क्षेत्र में एक वैश्विक ताकत के रूप में तेजी से उभर रहा है। भारतीय रेलवे के बोगियों, कोचों, लोकोमोटिव और प्रणोदन प्रणालियों का निर्यात विश्व के कई देशों में हो रहा है, जो भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और वैश्विक मांगों को पूरा करने की ताकत को दर्शाता है।वैश्विक बाजारों में भारत की धमक
भारत के रेलवे उत्पाद अब अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। हाल के आंकड़ों के अनुसार: मेट्रो कोच: ऑस्ट्रेलिया और कनाडा को निर्यात।
बोगियां: ब्रिटेन, सऊदी अरब, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया को आपूर्ति।
प्रणोदन प्रणालियां: फ्रांस, मैक्सिको, रोमानिया, स्पेन, जर्मनी और इटली में उपयोग।
यात्री कोच: मोजाम्बिक, बांग्लादेश और श्रीलंका को निर्यात।
लोकोमोटिव: मोजाम्बिक, सेनेगल, श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश और गिनी गणराज्य तक पहुंच।
मढ़ौरा संयंत्र: भारत की इंजीनियरिंग का गौरव
बिहार के मढ़ौरा लोकोमोटिव निर्माण संयंत्र ने भारत के रेलवे निर्यात में अहम भूमिका निभाई है। जून 2025 में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मढ़ौरा से गिनी गणराज्य के लिए पहले 6 इंजनों को हरी झंडी दिखाई। ये इंजन हाल ही में गिनी गणराज्य पहुंच चुके हैं। मढ़ौरा संयंत्र ने इवोल्यूशन सीरीज के लोकोमोटिव के लिए दूसरा रणनीतिक ऑर्डर भी हासिल किया है, जिसके तहत अफ्रीका के लिए कुल 150 इंजनों का निर्यात होगा। विश्वस्तरीय इवोल्यूशन सीरीज लोकोमोटिव
मढ़ौरा में निर्मित 4,500 एचपी इवोल्यूशन सीरीज लोकोमोटिव अपनी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ ईंधन दक्षता और उच्च तापमान वाले वातावरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं। ये लोकोमोटिव भारत की इंजीनियरिंग ताकत और वैश्विक रेलवे आपूर्ति श्रृंखला में योगदान की क्षमता का प्रतीक हैं। सार्वजनिक-निजी भागीदारी का नायाब उदाहरण
मढ़ौरा संयंत्र की सफलता भारत की रणनीतिक सार्वजनिक-निजी भागीदारी का जीवंत उदाहरण है। यह संयंत्र नवाचार, कौशल विकास और वैश्विक मांगों को पूरा करने में भारत की बढ़ती ताकत को रेखांकित करता है। यह न केवल भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि वैश्विक रेलवे क्षेत्र में भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित कर रहा है। मेक इन इंडिया की नई ऊंचाइयां
भारत का रेलवे उपकरण निर्यात न केवल आर्थिक विकास को गति दे रहा है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की साख को भी मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत को वैश्विक रेलवे आपूर्ति श्रृंखला में एक अग्रणी खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगी।
