85% पद खाली, भर्ती समर्थकों ने खोला बड़ा राज!

राजकीय शिक्षक संघ में प्रधानाचार्य भर्ती को लेकर गहरी खींचतान सामने आ रही है। संघ अब दो गुटों में बंटा नजर आ रहा है। एक ओर जहां संघ का एक धड़ा सीमित विभागीय पदोन्नति परीक्षा का विरोध कर रहा है, वहीं समर्थक शिक्षकों ने इसे जरूरी बताते हुए रविवार को देहरादून प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता की।

भर्ती समर्थक शिक्षकों ने दावा किया कि इंटर कॉलेजों और हाईस्कूलों में लंबे समय से नेतृत्व का अभाव है। उन्होंने बताया कि माध्यमिक शिक्षा विभाग में इंटर कॉलेजों के **1385 स्वीकृत पदों में करीब 85% पद खाली** हैं। इसी तरह हाईस्कूल स्तर पर **910 पद स्वीकृत हैं, लेकिन फीडर कैडर में 475 पद कम** होने से केवल पदोन्नति से इन रिक्तियों को भरना नामुमकिन है। उन्होंने साफ कहा कि *हाईस्कूल प्रधानाध्यापक का पद, इंटर कॉलेज प्रधानाचार्य का फीडर कैडर नहीं है*, इसलिए विभागीय भर्ती परीक्षा ही एकमात्र समाधान है।

शिक्षकों ने आरोप लगाया कि शिक्षक संघ की मौजूदा समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और वह शिक्षकों को गुमराह कर रही है। उनका कहना है कि 34 लंबित मांगों की अनदेखी कर केवल एक मुद्दे को हवा दी जा रही है।

भर्ती समर्थक गुट ने यह भी खुलासा किया कि विभागीय भर्ती परीक्षा को **30 विधायकों का समर्थन** प्राप्त है। सभी विधायकों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को समर्थन पत्र भेजा है। शिक्षकों ने बताया कि 2 अक्टूबर को परीक्षा समर्थन मंच से जुड़े शिक्षक रक्तदान करेंगे, 1 घंटे का उपवास रखेंगे और सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें साझा करेंगे। वहीं, 7 अक्टूबर को माननीय उच्च न्यायालय का फैसला आने वाला है, इसी कारण 5 अक्टूबर को श्रीनगर में प्रस्तावित प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया है।

भर्ती समर्थकों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि किसी कारणवश परीक्षा निरस्त होती है तो 9 अक्टूबर को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि स्थायी शैक्षिक नेतृत्व के बिना विद्यालयों की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है, इसलिए समय रहते विभागीय भर्ती परीक्षा कराना बेहद जरूरी है।

 

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