ऋतु खंडूरी बोलीं – स्थानीय भागीदारी से ही हिमालय का सतत विकास संभव

देहरादून। दून विश्वविद्यालय में इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव (IMI) द्वारा आयोजित 12वां सस्टेनेबल माउंटेन डेवलपमेंट समिट (SMDS-XII) सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। दो दिवसीय सम्मेलन में हिमालयी राज्यों के जनप्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा की।

सम्मेलन के दूसरे दिन पर्वतीय विधायकों की बैठक (MLM) आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने की। उन्होंने कहा कि हिमालय संवेदनशील क्षेत्र है, यहाँ के विकास के लिए स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विज्ञान और परंपरागत ज्ञान को मिलाकर नीतियाँ बनाने पर जोर दिया।

इस अवसर पर सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि हिमालय का विकास केवल सड़कों और इमारतों से नहीं मापा जा सकता। इसके लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और आजीविका से जुड़े विकास कार्य आवश्यक हैं।

विभिन्न राज्यों के नेताओं और विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम टुकी ने पर्वतीय क्षेत्रों में विज्ञान-आधारित निर्माण की आवश्यकता बताई। मुन्ना सिंह चौहान ने पारंपरिक लोक विज्ञान को अपनाने की बात कही, जबकि किशोर उपाध्याय ने वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और जनता को जोड़ने पर जोर दिया।

बृजभूषण गैरोला ने सम्मेलन से मिले ज्ञान को सरल भाषा में आम जन तक पहुँचाने की बात कही। अनुराधा राणा ने घरों के निर्माण हेतु सुरक्षित भूमि की कमी पर चिंता जताई। हेकिनी जखालू और वांगपांग कोन्याक ने स्थानीय ज्ञान और वैज्ञानिक प्रमाणिकता को विकास कार्यों का आधार बनाने पर बल दिया।

पर्यावरणविद् डॉ. रवि चोपड़ा ने जलवायु परिवर्तन और अनुकूलन पर अपने शोध साझा किए, वहीं यूकॉस्ट महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने सम्मेलन की उपलब्धियों को रेखांकित किया।

सम्मेलन में करीब 250 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, सामाजिक कार्यकर्ता, किसान और विद्यार्थी शामिल थे। कार्यक्रम स्थल पर स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी विशेष आकर्षण रही। समापन सत्र में आईएमआई अध्यक्ष रमेश नेगी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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