देहरादून। मुख्यमंत्री महिला सतत् आजीविका योजना, जिसे राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, अब गंभीर सवालों के घेरे में है। कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने रविवार को प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि योजना में भारी गड़बड़ी हुई है और लाभार्थी महिलाओं को आज तक इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया।
दसोनी ने कहा कि दून जिले के रायपुर ब्लॉक और मालदेवता क्षेत्र में करीब 300 महिलाओं को 2022 में ट्रेनिंग दी गई थी। इनमें से किसी को भी योजना के तहत 50-50 हजार रुपये का अनुदान आज तक नहीं मिला। कांग्रेस प्रवक्ता के मुताबिक यह रकम कुल 1.26 करोड़ रुपये बैठती है, जो विभाग द्वारा चयनित एक संस्था को जारी कर दी गई थी।
एनजीओ पर गंभीर आरोप
गरिमा ने कहा कि योजना के क्रियान्वयन में चयनित एनजीओ की भूमिका संदेह के घेरे में है। विभाग द्वारा जून 2025 में संस्था को नोटिस भी जारी किया गया, लेकिन दो महीने बीतने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर लाखों रुपये का अनुदान गया कहां?
दसोनी ने आरोप लगाया कि संस्था को मार्च 2022 में प्रशिक्षण कार्य हेतु 3.84 लाख रुपये दिए गए थे और इसके बाद 1.26 करोड़ रुपये परिसंपत्ति वितरण के लिए जारी किए गए। लेकिन आज तक लाभार्थी महिलाओं को न तो गाय मिली और न ही मधुमक्खी पालन के लिए उपकरण।
प्रशिक्षण के बाद भी महिलाएं खाली हाथ
योजना के तहत महिलाओं को 25-25 के समूह में डेयरी और मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग दी गई थी। महिलाओं ने बाकायदा प्रशिक्षण लिया, उम्मीद की कि ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें परिसंपत्ति मिल जाएगी। लेकिन तीन साल गुजर जाने के बावजूद कोई सहायता नहीं दी गई।
लाभार्थी महिलाओं का कहना है कि विभागीय अधिकारी कहते हैं कि पैसा संस्था को दे दिया गया है, जबकि संस्था का दावा है कि प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। ऐसे में असली सच्चाई क्या है, यह अब भी धुंधली है। कई महिलाएं मजबूरी में बिना गाय खरीदे इंतजार कर रही हैं और आर्थिक नुकसान झेल रही हैं।
समझौते में भी गड़बड़ी का आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी खुलासा किया कि विभाग और संस्था के बीच हुए अनुबंध में नियमानुसार संस्था के अध्यक्ष या सचिव के हस्ताक्षर होने चाहिए थे, लेकिन यहां प्रोजेक्ट मैनेजर ने दस्तखत किए। यह गड़बड़ी साफ तौर पर योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करती है।
गरिमा ने कहा कि सूत्रों के मुताबिक संस्था को स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है और इसी कारण विभाग कार्रवाई करने में ढिलाई बरत रहा है।
क्या थीं महिलाओं को मिलने वाली परिसंपत्तियां
योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए निम्नलिखित परिसंपत्तियां दी जानी थीं:
- डेयरी प्रबंधन : एक क्रॉस ब्रीड गाय, गाय हालिस्टन फिजन, वैप कटर, फीडिंग टब, पशुचारा आदि।
- बी-कीपिंग (मधुमक्खी पालन) : तीन बी-बॉक्स, कॉलोनी के साथ, हनी हार्वेस्टिंग सेफ्टी किट, वैक्स शीट आदि।
लेकिन आज तक इनमें से कोई भी वितरण नहीं हुआ।
महिलाओं में नाराजगी
रायपुर ब्लॉक के बजेत, सिरकी, रामनगर डांडा, मीडावाला, दुधियावाला और डांडी गांवों की महिलाओं का कहना है कि तीन साल से वे चक्कर काट रही हैं। अगर सरकार गंभीरता से काम करती, तो अब तक उनकी आजीविका सुधर चुकी होती।
पात्रता नियम भी सवालों में
दसोनी ने कहा कि योजना में पात्रता के लिए तय नियम थे कि लाभार्थी महिलाएं विधवा, निराश्रित या निर्बल वर्ग से हों और किसी अन्य योजना से लाभान्वित न हों। लेकिन गाइडलाइन का पालन भी सही तरीके से नहीं हुआ।
कांग्रेस का हमला
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला राज्य सरकार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत का नतीजा है। उन्होंने कहा कि योजनाएं कागजों और पुस्तकों में तो दिखती हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं। यह भ्रष्टाचार का नया नमूना है।
गरिमा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की कि वे केवल मंचों से महिला सशक्तिकरण की बातें न करें बल्कि खुद योजना की वास्तविकता जांचें और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करें।