उत्तराखंड में लगेगा स्वास्थ्य महाकुंभ: जानें कब और कहां लगेंगे 4604 शिविर
धामी सरकार का बड़ा कदम: 17 सितंबर से चलेगा प्रदेशव्यापी स्वास्थ्य पखवाड़ा
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देश पर उत्तराखंड सरकार 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक प्रदेशभर में “स्वास्थ्य पखवाड़ा” आयोजित करने जा रही है। इस आयोजन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती तक एक स्वास्थ्य महाकुंभ के रूप में मनाया जाएगा।
राज्य सचिवालय में स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की और स्पष्ट निर्देश दिए कि इस अभियान का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं हर नागरिक तक पहुँचाना है।
स्वास्थ्य पखवाड़े के दौरान मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-केन्द्रों में मुफ्त स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में मरीजों को जांच, परामर्श और नि:शुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही, वृहद रक्तदान शिविर भी आयोजित होंगे, जिनमें आम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में बताया गया कि प्रदेशभर में कुल 4604 स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। इनमें सबसे ज्यादा 679 शिविर पिथौरागढ़ में और 573 पौड़ी गढ़वाल में होंगे। देहरादून में 425, हरिद्वार और नैनीताल में 367-367, जबकि टिहरी में 533 शिविर लगाए जाएंगे।
स्वास्थ्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि हर वर्ग तक इसकी जानकारी पहुँचे। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं, टीबी मरीजों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को भी विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्य निर्णयों में शामिल हैं—
* हर शिविर में रक्तदान कैंप और उनकी अनिवार्य रिपोर्टिंग।
* मेडिकल कॉलेज स्तर पर बड़े रक्तदान शिविर।
* जिला अस्पतालों में हेल्थ डेस्क की स्थापना।
* विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी ग्रामीण शिविरों में।
* निजी मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों को अभियान से जोड़ना।
* सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी।
अंत में डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि यह सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच का अवसर नहीं, बल्कि एक **जन-जागरण अभियान** है, जो स्वस्थ उत्तराखंड की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।