दारुल जमाल हमला: क्यों फिर से भड़की बोको हरम की बर्बर हिंसा?

अबुजा (नाइजीरिया)। अफ्रीकी देश नाइजीरिया एक बार फिर आतंकी संगठन **बोको हरम** की खूनी वारदात से दहल उठा। बोर्नो राज्य के दारुल जमाल गांव में शुक्रवार देर रात आतंकियों ने हमला कर कम से कम **63 लोगों की निर्मम हत्या** कर दी। मरने वालों में 58 आम नागरिक और 5 सैनिक शामिल हैं। इस हमले ने पूरे क्षेत्र में खौफ का माहौल पैदा कर दिया है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमला रात करीब 9 बजे (स्थानीय समयानुसार) हुआ। हथियारबंद आतंकियों ने गांव में धावा बोला और अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। उन्होंने न केवल लोगों की हत्या की बल्कि कई घरों में आग भी लगा दी। हमले के दौरान कई लोग जान बचाकर भागने में सफल हुए, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं।

बोर्नो राज्य के गवर्नर **बाबागाना उमरा जुलुम** शनिवार को घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात की और घटना को बेहद दुखद बताया। गवर्नर ने कहा, “यह समुदाय कुछ महीने पहले ही अपने घर लौटा था और सामान्य जीवन जीना शुरू कर रहा था, लेकिन बोको हरम आतंकियों ने उन्हें फिर से उजाड़ दिया।”

गौरतलब है कि यह वही लोग हैं जिन्हें पहले बोको हरम की हिंसा के चलते विस्थापित होना पड़ा था। हाल ही में दो महीने पहले ये लोग दारुल जमाल लौटे थे। लेकिन शुक्रवार की रात उनकी उम्मीदें और जीवन फिर से तबाह हो गए।

ज्ञात हो कि बोको हरम का गठन साल **2009** में हुआ था। इसका घोषित उद्देश्य पश्चिमी शिक्षा का विरोध करते हुए कट्टरपंथी इस्लामी शासन लागू करना है। संगठन अब तक हजारों लोगों की जान ले चुका है। 2021 में इसके कुख्यात सरगना **अबुबकर शेकाऊ** की मौत के बाद यह दो गुटों में बंट गया। एक गुट इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस (ISWAP) से जुड़कर सेना को निशाना बनाता है, जबकि दूसरा गुट नागरिकों पर हमले कर आतंक और लूटपाट फैलाता है।

दारुल जमाल की इस घटना ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि बोको हरम की हिंसा अब भी नाइजीरिया के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा संकट है।

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