देहरादून । गढ़वाल विश्वविद्यालय से संबद्ध अशासकीय कॉलेजों के शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी आज से आंदोलन पर उतर आए हैं।

तीन माह का वेतन न मिलने से आक्रोशित कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। आंदोलन की शुरुआत प्रदेशभर के कॉलेजों में एक साथ हुई, जहां शिक्षकों और कर्मचारियों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराज़गी जाहिर की।

ग्रुटा (गढ़वाल विश्वविद्यालय शिक्षक संघ) के महासचिव प्रो. डॉ. डी. के. त्यागी ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षक और कर्मचारी अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। सरकार द्वारा अनुदान (ग्रांट) स्वीकृत किए जाने के बावजूद वेतन रोक दिया गया है। उन्होंने निदेशालय पर आरोप लगाया कि वह बिना किसी कारण के वेतन जारी नहीं कर रहा है।
त्यागी ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार और संबंधित विभाग तत्काल वेतन जारी नहीं करते हैं, तो आंदोलन और उग्र रूप धारण करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के भविष्य का निर्माण करते हैं, लेकिन आज वे स्वयं अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हैं।
कर्मचारियों ने यह भी कहा कि लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहे परिवार अब गंभीर स्थिति में पहुँच गए हैं। बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और अन्य ज़रूरी खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो गया है। विरोध स्वरूप पूरे प्रदेश के कॉलेजों में शिक्षकों और कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर कार्य किया।
प्रदेश के अन्य जिलों के कॉलेजों में भी यही आंदोलन जारी है। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे कक्षाओं का बहिष्कार कर बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।