सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
कोहिमा। नगालैंड की राजधानी कोहिमा, अपने शांतिपूर्ण माहौल, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए जानी जाती है, लेकिन अब यह एक और कारण से सुर्खियों में है—इसे भारत में महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित शहर माना जा रहा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगर अपनी चमक-दमक और प्रभुता पर गर्व कर सकते हैं, लेकिन महिलाओं की सुरक्षा के मामले में कोहिमा ने इन सभी को पीछे छोड़ दिया है। यह छोटा सा शहर न केवल शांति और सौहार्द्र का प्रतीक है, बल्कि महिलाओं को एक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल प्रदान करने में भी अव्वल है।
हाल के आंकड़ों और सर्वेक्षणों के अनुसार, कोहिमा में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर देश के अन्य बड़े शहरों की तुलना में नगण्य है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट्स में कोहिमा को महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित शहरों में शीर्ष पर रखा गया है। यहां छेड़खानी, उत्पीड़न या हिंसा की घटनाएं बेहद कम हैं। स्थानीय निवासी और पर्यटक दोनों ही कोहिमा की सड़कों पर रात के समय भी बिना किसी डर के घूमने की बात करते हैं।
मेरेनला, जो एक कॉलेज छात्रा हैं, कहती हैं, “कोहिमा में मैं रात को भी अकेले बाजार जा सकती हूं। यहां लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, और महिलाओं को लेकर समाज में एक सकारात्मक सोच है।” यह भावना कोहिमा की सामाजिक संरचना और सामुदायिक एकजुटता को दर्शाती है।
कोहिमा की यह उपलब्धि केवल कानून-व्यवस्था की मजबूती तक सीमित नहीं है। नगालैंड की संस्कृति में महिलाओं को हमेशा से सम्मान और महत्व दिया गया है। नगा समाज में महिलाएं न केवल घर की धुरी हैं, बल्कि सामुदायिक निर्णयों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी होती है। कोहिमा में कई स्वयंसेवी संगठन और महिला समूह सक्रिय रूप से लैंगिक समानता और सुरक्षा को बढ़ावा देते हैं।
नगा मदर्स एसोसिएशन (एनएमए) जैसी संस्थाएं महिलाओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए लंबे समय से काम कर रही हैं। संस्था से जुड़ी अबेई-उ मेरु कहती हैं, “हमारी संस्कृति में महिलाओं को देवी के रूप में देखा जाता है। यह सामाजिक मूल्य कोहिमा को सुरक्षित बनाता है।” इसके अलावा, स्थानीय पुलिस और प्रशासन भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बेहद संवेदनशील और सक्रिय हैं।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगर अपनी आर्थिक प्रगति, आधुनिकता और अवसरों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन महिलाओं की सुरक्षा के मामले में ये शहर अक्सर सवालों के घेरे में रहते हैं। दिल्ली में जहां रात के समय महिलाओं का अकेले बाहर निकलना जोखिम भरा माना जाता है, वहीं कोहिमा में यह सामान्य बात है। मुंबई की तेज रफ्तार जिंदगी और कोलकाता की सांस्कृतिक विरासत के बावजूद, इन शहरों में महिलाओं के खिलाफ अपराध की खबरें समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
वहीं, कोहिमा की सड़कें महिलाओं के लिये न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि स्थानीय लोग पर्यटकों और बाहरी लोगों के साथ भी आत्मीयता से पेश आते हैं। कोहिमा की यह उपलब्धि न केवल नगालैंड के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है।