आईजोल। जबकि असम के प्रमुख नगर गुवाहाटी सहित पूर्वोत्तर के अनेक शहरों में भिखारियों की तादाद बढ़ रही है, देश के सबसे शांत राज्य में शुमार मिजोरम की सरकार ने भिक्षावृत्ति पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। मिजोरम, इस समस्या से निपटने के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरा है। मिजोरम ने न केवल भिक्षावृत्ति पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है, बल्कि भिक्षावृत्ति में लिप्त लोगों को उनके मूल स्थान पर वापस भेजने की एक व्यवस्थित प्रणाली भी विकसित की है।
गुवाहाटी जैसे बड़े नगर में भी सड़कों पर बढ़ती भिक्षावृत्ति ने आम निवासियों के बीच चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। जहां एक ओर गुवाहाटी अपनी व्यापारिक और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए जाना जाता है, वहीं भिक्षावृत्ति की बढ़ती प्रवृत्ति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में मिजोरम की यह पहल एक सबक हो सकती है।
भिक्षावृत्ति, जो न केवल शहरी सौंदर्य को प्रभावित करती है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असंतुलन को भी बढ़ावा देती है। मिजोरम में ये एक गंभीर मुद्दा बन रही थी। इसे देखते हुए, मिजोरम सरकार ने भिक्षावृत्ति को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का कड़ा कदम उठाया। राज्य सरकार ने एक ऐसी व्यवस्था लागू की है, जिसमें भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की पहचान और उनकी पृष्ठभूमि का सत्यापन कर उन्हें उनके मूल स्थान पर वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस प्रक्रिया में सामाजिक कल्याण विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन का समन्वय शामिल है। इसके अलावा, सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया कि इन व्यक्तियों को उनके गृह क्षेत्रों में पुनर्वास और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएं, ताकि वे दोबारा भिक्षावृत्ति की ओर न लौटें।