उत्तराखंड में भारी बारिश का असर अब आपदा के रूप में दिखने लगा है। विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव स्यानाचट्टी में यमुना नदी पर अचानक बनी बड़ी झील ने तबाही मचा दी है। इस झील के जलमग्न होने से कस्बे का बड़ा हिस्सा डूब चुका है और निचले इलाकों पर खतरा मंडरा रहा है।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार दोपहर बाद कुपड़ा गदेरे में भारी मलबा आने से यमुना नदी का प्रवाह बाधित हो गया। पानी रुकने से करीब आधा किलोमीटर लंबी और ढाई से तीन सौ मीटर चौड़ी झील बन गई। इसके चलते स्यानाचट्टी कस्बे के कई घर, होटल, गढ़वाल मंडल विकास निगम का विश्राम गृह, बेसिक और माध्यमिक विद्यालय पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं।
स्थिति इतनी भयावह है कि यमुनोत्री हाईवे पर बना मोटर पुल और कस्बे के लगभग 30 घर और होटल डूब गए। स्थानीय लोगों के सामने अब रोजमर्रा की जरूरतों और सुरक्षा को लेकर गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। आसपास के गांव—कुपड़ा, कुनसाला, त्रिखली और ओजरी के लोग दहशत में हैं। वहीं, निचले क्षेत्रों जैसे पुजार, कुथनोंर, उपली खरादी और निचली खरादी समेत यमुना किनारे बसे गांवों को भी अलर्ट पर रखा गया है।
खरादी कस्बे और जल विद्युत परियोजना पर भी भारी खतरा बताया जा रहा है। यदि झील अचानक फूटती है तो इन इलाकों में बड़ी तबाही मच सकती है।
जिलाधिकारी शांत आर्य ने बताया कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी घर और होटल खाली करा दिए गए हैं। प्रशासन ने बड़कोट तक अलर्ट जारी किया है। एसडीआरएफ, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें पूरी रात मौके पर रहकर हालात पर नजर रखे हुए हैं। वहीं, एनडीआरएफ की टीम भी उपकरणों के साथ पहुंच गई है ताकि झील से पानी की निकासी के उपाय किए जा सकें।
स्थानीय लोग अब प्रशासनिक प्रयासों और मौसम में सुधार की उम्मीद लगाए हुए हैं, लेकिन फिलहाल स्यानाचट्टी और यमुना किनारे बसे गांवों में दहशत का माहौल बना हुआ है।