देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार ने युवाओं, महिलाओं और भूतपूर्व सैनिकों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ न्याय व्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में कई बड़े फैसले लिए हैं। कैबिनेट बैठक में तीन महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनका सीधा असर राज्य के विकास और आमजन की जिंदगी पर पड़ेगा।
सबसे पहले महिलाओं, युवाओं और भूतपूर्व सैनिकों के लिए अलग-अलग रोजगार नीति लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस नीति के तहत सरकारी और निजी संस्थानों में नौकरी के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसे सरकारी सेवा, नीट, नर्सिंग, विदेशी भाषाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। साथ ही बड़े स्तर पर युवा महोत्सव और रोजगार मेलों का आयोजन किया जाएगा।
व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आईटीआई, पॉलिटेक्निक और स्कूल आपसी समन्वय से कार्य करेंगे। वहीं, युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मधुमक्खी पालन, एप्पल मिशन और बागवानी से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य सरकार ने स्थानीय उत्पादों के विपणन के लिए कृषि विभाग और आईटीबीपी के बीच समझौता किया है और जल्द ही अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ भी एमओयू होंगे।
भूतपूर्व सैनिकों को भी रोजगार और स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ा जाएगा। उपनल के माध्यम से कार्यरत सैनिकों को उनकी योग्यता के अनुसार विभिन्न संस्थानों में सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
दूसरा बड़ा फैसला है उत्तराखण्ड अपराध से पीड़ित सहायता (संशोधन) योजना, 2025। सचिव गृह शैलेश बगोली ने बताया कि इस संशोधन से पोक्सो पीड़ितों को समयबद्ध और प्रभावी सहायता मिल सकेगी। योजना में पीड़ितों के लिए न्यूनतम और अधिकतम क्षतिपूर्ति राशि का स्पष्ट प्रावधान जोड़ा गया है, जिससे न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित हो सकेगा।
तीसरा महत्वपूर्ण निर्णय है उत्तराखण्ड साक्षी संरक्षण योजना, 2025। इस योजना का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाना और साक्षियों को भयमुक्त वातावरण प्रदान करना है। इसके तहत पहचान गोपनीयता, स्थान परिवर्तन, संपर्क विवरण में बदलाव, भौतिक सुरक्षा और वित्तीय सहायता जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। इसके लिए एक राज्य स्तरीय समिति गठित की गई है, जिसमें न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि इन योजनाओं के माध्यम से रोजगार, सुरक्षा और न्याय—तीनों मोर्चों पर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यह पहल उत्तराखण्ड सरकार की पारदर्शिता और जनता की भलाई के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।