उत्तरकाशी। उत्तरकाशी जिले के आराकोट-बंगाण क्षेत्र में इस बार सेब की फसल पूरी तरह से तैयार है, लेकिन प्राकृतिक आपदा और सड़कों के बंद होने से बागवानों की मेहनत बाजार तक नहीं पहुंच पा रही है। बागवानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है क्योंकि मंडियों तक न पहुंच पाने के कारण सेब की हजारों पेटियां सड़ने की कगार पर हैं।
जिले के आराकोट-दुचाणु-किराणु मोटर मार्ग पिछले एक सप्ताह से बंद पड़ा है। इस कारण नुराणु गांव और आसपास के 15 से 20 बागवानों के सेब की करीब एक हजार पेटियां पैक होने के बावजूद मंडियों तक नहीं पहुंच सकीं। नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान महेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि सड़कें न खुलने से बागवानों की मेहनत बर्बाद हो रही है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग और पीएमजेएसवाई पर नाराजगी जताई और चेतावनी दी कि अगर मार्ग जल्द न खोला गया तो क्षेत्र के लोग उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
ग्रामीणों ने बताया कि आपदा ने पहले ही क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचाया है। अब अगर सेब की तैयार फसल बाजार तक नहीं पहुंची तो बागवानों की आर्थिक स्थिति और खराब हो जाएगी। रोजी लाल, बालचंद नेगी (पूर्व प्रधान नुराणु) और मखन सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि लागत और मेहनत के बाद पैदा हुआ यह फल यदि मंडियों में नहीं बिक पाया तो उनकी साल भर की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा।
गौरतलब है कि हिमाचल सीमा से सटा आराकोट-बंगाण क्षेत्र उत्तराखंड का प्रमुख सेब उत्पादन क्षेत्र माना जाता है। यहां के सेब अपनी मिठास और गुणवत्ता के लिए दूर-दराज की मंडियों तक भेजे जाते हैं। लेकिन इस बार जब फसल पूरी तरह तैयार हुई, तभी आपदा और भूस्खलन से लिंक रोड बंद हो गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन मुख्य सड़कों की बहाली पर तो ध्यान दे रहा है, लेकिन जब तक लिंक रोड नहीं खुलेंगे तब तक सेब मंडियों तक नहीं पहुंच पाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सड़कों की मरम्मत और बहाली का काम युद्ध स्तर पर चलाया जाए, ताकि बागवानों की मेहनत व्यर्थ न जाए।