संसद से चुनाव आयोग तक विपक्ष का मार्च क्यों रुका? अखिलेश यादव ने खोला बड़ा राज

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन ने बिहार में विशेष समरी संशोधन (SIR) और 2024 लोकसभा चुनाव में कथित “मतदाता अनियमितताओं” के खिलाफ सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। गठबंधन के नेताओं ने संसद से लेकर चुनाव आयोग तक मार्च निकालने की घोषणा की, लेकिन पुलिस ने इस मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया।

इस दौरान संसद से निकलते ही जगह-जगह पुलिस ने कड़े बैरिकेड लगाकर नेताओं को रोकने की कोशिश की। इसके बावजूद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पुलिस के अवरोध को लांघते हुए सीधे प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंच गए। उनके इस कदम से माहौल और गर्मा गया।

जब विपक्षी सांसदों को आगे बढ़ने की इजाज़त नहीं मिली, तो उन्होंने मौके पर ही धरना शुरू कर दिया। धरने के दौरान अखिलेश यादव ने पुलिस की कार्रवाई को लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि “पुलिस का इस्तेमाल विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए किया जा रहा है। यह जनता के अधिकारों पर हमला है और इससे साफ है कि सरकार चुनाव से पहले विपक्ष को डराने की कोशिश कर रही है।”

प्रदर्शन में कांग्रेस, राजद, टीएमसी, शिवसेना (उद्धव गुट) समेत कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। उनका आरोप है कि बिहार में SIR के नाम पर मतदाता सूची में धांधली की जा रही है और लाखों नाम बिना कारण काटे जा रहे हैं। नेताओं का कहना है कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है और 2024 के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश है।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि उन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना पड़ा, क्योंकि चुनाव आयोग के बाहर भीड़ जमा होने से सुरक्षा और यातायात प्रभावित हो सकता था।

हालांकि, विपक्षी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि उनकी लड़ाई जारी रहेगी और वे चुनाव आयोग से मिलकर इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग करेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में इसका असर और गहरा हो सकता है।

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