दुबई/मॉस्को। अमेरिका की मध्यस्थता से हुए अजरबैजान-आर्मेनिया शांति समझौते को लेकर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने शनिवार को चेतावनी दी कि वह ट्रंप की पहल से प्रस्तावित ‘ट्रीप’ (Trump Route for International Peace and Prosperity) कॉरिडोर को रोक सकता है। यह गलियारा अजरबैजान को नाख़िचेवन और वहां से तुर्की तक सीधी पहुंच देने वाला है, जो दक्षिणी आर्मेनिया से होकर गुजरेगा।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली अकबर वेलायती ने इस कॉरिडोर को “ट्रंप के भाड़े के सैनिकों का कब्रिस्तान” बताते हुए कहा कि यह ईरान की सीमाओं के पास विदेशी हस्तक्षेप है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ईरान द्वारा हाल ही में उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में किए गए सैन्य अभ्यास इसी तैयारी का संकेत हैं।
हालांकि ईरानी विदेश मंत्रालय ने इस क्षेत्रीय समझौते का औपचारिक रूप से स्वागत किया था, लेकिन उसने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी विदेशी हस्तक्षेप से क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान हो सकता है। ईरान की चिंता का मुख्य कारण यह है कि नया कॉरिडोर उसके भौगोलिक और भू-राजनीतिक प्रभाव को सीमित कर सकता है।
वहीं, अजरबैजान के राजदूत एलिन सुलेमानोव ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि अब दुश्मनी का अध्याय खत्म हो गया है और यह पहल क्षेत्रीय समृद्धि की ओर कदम है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम शांति तभी संभव होगी जब आर्मेनिया नागोर्नो-काराबाख़ पर अपने दावे को छोड़ देगा।
ट्रंप की मौजूदगी में व्हाइट हाउस में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ, जिसके तहत अमेरिका को कॉरिडोर के विकास में विशेष अधिकार दिए गए हैं। इस रूट से ऊर्जा और संसाधनों के निर्यात में बड़ा बदलाव आ सकता है।

