चंपावत जिले के अतिथि शिक्षक इन दिनों गहरी पीड़ा में हैं। एक ओर सरकार डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर छुट्टियों में भी ऑनलाइन पढ़ाने वाले शिक्षकों को अब तक मानदेय नहीं मिला है। ऐसे में अतिथि शिक्षक अब धरना प्रदर्शन करने को मजबूर हो गए हैं।
गौरतलब है कि ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन छुट्टियों के दौरान जब पूरे देश में स्कूल बंद थे, तब चंपावत जिले के इन शिक्षकों ने ऑनलाइन माध्यम से बच्चों की पढ़ाई जारी रखी। उनका सिर्फ एक ही उद्देश्य था — किसी भी हाल में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। लेकिन अब जब मानदेय का भुगतान होना चाहिए था, तब सरकार की ओर से कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई।
नैनीताल, अल्मोड़ा और देहरादून जैसे जिलों में मानदेय भुगतान के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं, लेकिन चंपावत के शिक्षकों को अब भी सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं। इससे क्षुब्ध होकर अतिथि शिक्षकों ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।
शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष उमेश मिश्रा, रेखा बोहरा, नवीन पुनेठा, महामंत्री तारा सिंह, और संयुक्त सचिव सुनील कुमार प्रहरी सहित अन्य शिक्षक नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ वेतन नहीं, बल्कि सम्मान की लड़ाई है। जब देशभर में शिक्षा ठप थी, तब इन शिक्षकों ने समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई, और अब उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।
शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मानदेय भुगतान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन तेज करने पर मजबूर होंगे।