उत्तरकाशी आपदा में राहत कार्यों की धीमी रफ्तार पर गरिमा दसौनी का सरकार पर निशाना

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने उत्तरकाशी आपदा में राहत कार्यों की धीमी रफ्तार और सरकारी तंत्र की विफलता पर प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि दो बार डबल इंजन की सरकार देने के बावजूद पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग आज भी भय और अनिश्चितता में जीने को मजबूर हैं।

गरिमा ने प्रदेश सरकार की Disaster Relief Management (DRM) वेबसाइट पर मौजूद अत्याधुनिक आपदा प्रबंधन तकनीकों की सूची का हवाला देते हुए तीखे सवाल उठाए। वेबसाइट पर उपलब्ध कुछ मुख्य तकनीकी व्यवस्थाएं इस प्रकार हैं:

  • 📌 National Landslide Risk Mitigation System
  • 📌 National Landslide Forecasting System
  • 📌 Glacier Lake Outburst Flood Risk Management
  • 📌 Integrated Alert Common Protocol
  • 📌 Early Warning System
  • 📌 Decision Support System
  • 📌 USDMA & SEOC Alert System
  • 📌 SDRF Infrastructure

दसौनी ने सवाल किया कि, “जब इतनी उन्नत तकनीकों का दावा किया जा रहा है, तो उत्तरकाशी आपदा के दौरान ये सारी व्यवस्थाएं कहाँ थीं? पूर्वानुमान कहाँ था? समय पर चेतावनी क्यों नहीं मिली? राहत और बचाव कार्यों में तत्परता क्यों नहीं दिखी?”

उन्होंने कहा कि प्रभावित गांवों में लोग राहत की प्रतीक्षा कर रहे हैं, न राहत शिविर हैं, न ज़मीनी स्तर पर कोई कार्य योजना दिखाई दे रही है। “लोग मलबे में दबे हैं, प्रशासन असहाय है और नेता लापता हैं,” दसौनी ने कहा।

राजनीतिक नेतृत्व पर भी उठाए सवाल
गरिमा दसौनी ने कटाक्ष करते हुए पूछा कि, “उत्तरकाशी जैसे संवेदनशील जिले में स्थानीय सांसद, क्षेत्रीय विधायक, प्रभारी मंत्री और भाजपा संगठन के नेता कहां हैं? क्या ये लोग सिर्फ चुनाव के समय ही जनता को याद करते हैं?”

“मंत्री कर रहे हैं राखी कार्यक्रम, जनता मर रही है आपदा में”
दसौनी ने भाजपा नेताओं की संवेदनहीनता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब उत्तरकाशी आपदा राहत की सबसे ज्यादा ज़रूरत में है, उस वक्त कृषि मंत्री गणेश जोशी देहरादून में हजारों महिलाओं से राखी बंधवा कर साड़ी बांट रहे हैं। वहीं विधायक सविता कपूरउमेश शर्मा काऊ भी रंगारंग रक्षाबंधन कार्यक्रमों में व्यस्त हैं।

“ये केवल वेबसाइटों और विज्ञापनों का विकास है,” गरिमा ने कहा, “असल ज़मीन पर हालात बद से बदतर हो चुके हैं और भाजपा सरकार के पास उत्तराखंड की जनता के लिए कोई ठोस योजना नहीं है।

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