बागेश्वर: पंडित बीडी पांडेय परिसर में विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों को लैब की सुविधा नहीं, शोध कार्य में आ रही समस्या

पंडित बीडी पांडेय परिसर, बागेश्वर में विज्ञान संकाय के स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए प्रयोगशाला (लैब) की सुविधाएं अपर्याप्त हैं। इसके कारण छात्र-छात्राएं अपने संबंधित विषयों में शोध कार्य नहीं कर पा रहे हैं। परिसर में प्रयोगशालाओं की कमी के चलते विद्यार्थियों को अपने शोध कार्य में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

लैब की कमी और शोध कार्य में समस्या

विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों का कहना है कि प्रत्येक कक्षा के लिए परिसर में मानकों के अनुसार लैब की सुविधा नहीं है। विज्ञान विषयों में शोध करने के लिए प्रयोगशालाएं बेहद आवश्यक होती हैं, लेकिन परिसर में छात्रों के लिए पर्याप्त लैब नहीं हैं। इसके परिणामस्वरूप छात्रों को अपनी परियोजनाओं और शोध कार्यों में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

वर्तमान में, परिसर में विभिन्न विज्ञान विषयों की प्रयोगशालाओं में अत्यधिक कमी है, जो छात्रों के लिए समस्या का कारण बन रही है। इस कमी के चलते, विद्यार्थियों को विज्ञान के विभिन्न विषयों पर शोध करने में कठिनाई हो रही है, जो कि उनके अकादमिक विकास में बड़ी रुकावट पैदा कर रही है।

रसायन विज्ञान की लैब में रसायनों और गैसों की कमी

पंडित बीडी पांडेय परिसर के रसायन विज्ञान विभाग में लैब की स्थिति भी चिंताजनक है। यहां पर रसायनों की कमी के कारण विद्यार्थियों को लघु शोध कार्य करने में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इसके अलावा, प्रयोगशाला में गैस की आपूर्ति भी नहीं है, और गैस पाइपलाइन की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जो रासायनिक प्रयोगों के लिए अत्यंत आवश्यक होती है। इस स्थिति से विद्यार्थियों को रासायनिक प्रयोग करने में काफी कठिनाइयाँ हो रही हैं, जिससे उनका शोध कार्य भी प्रभावित हो रहा है।

भौतिक विज्ञान की लैब में उपकरणों की कमी

भौतिक विज्ञान की प्रयोगशाला में भी विद्यार्थियों को पर्याप्त उपकरणों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों का कहना है कि भौतिक विज्ञान के प्रयोगशाला में एक समय में केवल पांच विद्यार्थी ही शोध कार्य कर सकते हैं, क्योंकि प्रयोगशाला में उपकरणों की भारी कमी है। इसके परिणामस्वरूप, छात्रों को अपने शोध कार्य में असंतोषजनक अनुभव हो रहा है, और वे अपनी परियोजनाओं को पूरा करने में अक्षम हो रहे हैं।

भूगोल विभाग की लैब में उपकरणों का अस्त व्यस्त होना

भूगोल विभाग में उपकरणों की कमी तो नहीं है, लेकिन प्रयोगशाला कक्षों की पर्याप्त संख्या न होने के कारण सारे उपकरण एक ही कक्ष में अस्त-व्यस्त पड़े हुए हैं। इससे विद्यार्थियों को उपकरणों के उपयोग में समस्या हो रही है। कई बार छात्रों को यह उपकरणों की व्यवस्था करने में भी दिक्कतें आती हैं, जो शोध कार्य की गति को धीमा कर देती हैं।

निदेशक डॉ. गिरिश चंद्र साह का बयान

पंडित बीडी पांडेय परिसर बागेश्वर के निदेशक डॉ. गिरिश चंद्र साह ने इस मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि परिसर में प्रयोगशालाओं और कक्षों की स्थिति मानकों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने बताया कि परिसर में छह लैब और 10 कक्षों के लिए प्रस्ताव शासन के पास भेजा गया है। डॉ. साह ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही इन प्रस्तावों को मंजूरी मिल जाएगी, जिसके बाद प्रयोगशालाओं और कक्षों की संख्या बढ़ाई जाएगी और विद्यार्थियों को बेहतर शोध कार्य की सुविधा मिलेगी।

विद्यार्थियों का आक्रोश

वहीं, छात्रों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से इस समस्या को उठाया जा रहा है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। छात्रों का मानना है कि विज्ञान के क्षेत्र में गुणवत्ता और उत्कृष्टता को बनाए रखने के लिए बेहतर सुविधाएं और आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता है। यदि इन सुविधाओं को शीघ्र उपलब्ध नहीं कराया गया, तो यह विद्यार्थियों के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

शिक्षा में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की आवश्यकता

शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि विद्यार्थियों को उनके अध्ययन और शोध के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध हों। पंडित बीडी पांडेय परिसर में प्रयोगशालाओं की कमी और उपकरणों की अपर्याप्तता विद्यार्थियों की शिक्षा पर प्रतिकूल असर डाल रही है। अगर प्रशासन इस समस्या का समाधान शीघ्र नहीं करता, तो यह न केवल परिसर की प्रतिष्ठा पर असर डालेगा, बल्कि विद्यार्थियों के करियर को भी प्रभावित करेगा।

निष्कर्ष

इस प्रकार, पंडित बीडी पांडेय परिसर में प्रयोगशालाओं की अपर्याप्तता और सुविधाओं की कमी विद्यार्थियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। परिसर के निदेशक डॉ. गिरिश चंद्र साह ने इस समस्या का समाधान करने के लिए प्रस्ताव भेजा है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि यह प्रस्ताव जल्द मंजूर हो ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध कार्य के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

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