ICE की नई नीति लागू: अब अवैध प्रवासियों को नहीं मिलेगी जमानत की राहत

वाशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का मन बना लिया है। आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) ने एक नई और कठोर नीति लागू की है, जिसके तहत अमेरिका में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे प्रवासियों को अब जमानत की सुनवाई का अधिकार नहीं मिलेगा। इसका सीधा मतलब है कि प्रवासी निर्वासन की प्रक्रिया पूरी होने तक हिरासत में रहेंगे, जो महीनों या यहां तक कि वर्षों तक खिंच सकती है।

आईसीई नीति का खुलासा

इस नई नीति की जानकारी 8 जुलाई को ICE के कार्यवाहक निदेशक टॉड एम. लियोन्स ने दी। उन्होंने बताया कि गृह सुरक्षा विभाग ने हिरासत और रिहाई के नियमों की कानूनी समीक्षा के बाद यह फैसला लिया है। लियोन्स के अनुसार, अब अमेरिका में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले किसी भी व्यक्ति को हिरासत में ही रखा जाएगा, चाहे उसने कितना भी समय अमेरिका में बिताया हो या उसके बच्चे अमेरिकी नागरिक क्यों न हों।

क्या है नई नीति?

  • अवैध प्रवासियों को जमानत की सुनवाई नहीं मिलेगी

  • हिरासत में रहने की अवधि निर्वासन की प्रक्रिया पूरी होने तक होगी।

  • नीति का उद्देश्य निर्वासन प्रक्रिया में तेजी लाना है।

  • ICE को अगले चार वर्षों के लिए 45 अरब डॉलर का बजट मिला है, जिससे हिरासत केंद्रों की सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।

कानूनी और सामाजिक प्रतिक्रिया

द वाशिंगटन पोस्ट और द इंडिपेंडेंट की रिपोर्टों के मुताबिक, इस नीति की कानूनी और मानवाधिकार समूहों से तीखी आलोचना हो रही है। आव्रजन मामलों में विशेषज्ञता रखने वाले वकीलों का कहना है कि यह कदम प्रवासियों के लिए न्याय तक पहुंच को बेहद कठिन बना देगा

डलास के आव्रजन वकील पॉल हंकर ने कहा,

“इस नीति से प्रवासियों को निर्वासन तक अनिश्चितकालीन हिरासत में रखा जा सकता है।”

वकीलों का यह भी मानना है कि यह नीति खासकर उन लाखों प्रवासियों पर असर डालेगी, जो दशकों से अमेरिका में रह रहे हैं, जिनके बच्चे अमेरिकी नागरिक हैं और जो समाज में रच-बस गए हैं।

ICE का तर्क

ICE के एक प्रवक्ता ने मीडिया को बताया कि यह नीति “कानून की गलत व्याख्या को सुधारने और अमेरिकी सुरक्षा को मजबूत करने” के लिए बनाई गई है। ICE का दावा है कि इससे देश की सड़कों से “अवैध अपराधियों” को हटाया जा सकेगा। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि सरकार द्वारा मिले बजट से हिरासत केंद्रों की क्षमता 80,000 से बढ़ाकर 100,000 बिस्तर तक की जाएगी।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग की सहायक सचिव ट्रिशिया मैकलॉघलिन ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा,

“राष्ट्रपति ट्रंप और सचिव नोएम अब इस नीति को सख्ती से लागू कर रहे हैं। अवैध प्रवासी कानून तोड़ने वाले अपराधी हैं और उन्हें अमेरिकी सड़कों पर नहीं घूमने दिया जाएगा। उनके हमदर्द चाहे जितना रोना रो लें, कानून का पालन किया जाएगा।”

नीतिगत बदलाव की व्यापकता

यह नीति ट्रंप प्रशासन की पहले से चली आ रही उस आव्रजन नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह अवैध आव्रजन को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखता है। इस बदलाव के जरिए प्रशासन स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि अब कोई भी अवैध प्रवासी जमानत के भरोसे अमेरिका में नहीं रह पाएगा।

निष्कर्षतः, यह नीति अमेरिका में रह रहे लाखों अवैध प्रवासियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। जहां सरकार इसे देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बता रही है, वहीं वकीलों और मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि इससे न्याय, मानवता और संवैधानिक अधिकारों पर असर पड़ेगा। आने वाले महीनों में इस नीति को लेकर कानूनी चुनौतियां और सामाजिक बहस तेज हो सकती है।

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