गोपेश्वर, चमोली |
उत्तराखंड का चमोली ज़िला एक बार फिर भारी बारिश की मार झेल रहा है। रविवार रात हुई तेज बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। 176 आंतरिक मोटर मार्गों में यातायात पूरी तरह ठप हो गया था। हालांकि राहत की बात यह है कि जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) के त्वरित प्रयासों से अब तक 155 मोटर मार्ग खोल दिए गए हैं, जबकि 21 सड़कों पर अभी भी यातायात बाधित है।
बारिश का तांडव:
रविवार की रात चमोली जिले में मूसलाधार बारिश हुई, जिससे भूस्खलन, बोल्डर गिरने और जलभराव जैसी स्थितियां उत्पन्न हो गईं। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें टूटने, पैदल रास्तों के बह जाने और संपर्क मार्गों के ध्वस्त होने की खबरें सामने आई हैं। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है, जिससे लोगों को जरूरी सेवाओं और चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।
सड़कें बनी मुसीबत:
बारिश के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित लिंक मोटर मार्ग हुए हैं, जो गांवों को जिला या तहसील मुख्यालयों से जोड़ते हैं। आपदा परिचालन केंद्र द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार:
कुल बाधित मोटर मार्ग: 176
अब तक खुले मार्ग: 155
अब भी बंद मार्ग: 21
प्रभावित मार्गों में कुछ प्राथमिक विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों और कृषि क्षेत्रों तक जाने वाले रास्ते भी शामिल हैं, जिससे स्थानीय जीवन ठप हो गया है।
राहत व बचाव कार्य:
जिला प्रशासन की ओर से त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए मजदूरों की टीमों और JCB मशीनों को कई जगहों पर तैनात किया गया है। कई स्थानों पर काम युद्धस्तर पर चल रहा है, लेकिन कुछ जगहों पर भू-धंसाव और भारी बोल्डर हटाने में तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं।
चमोली के जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि सभी शेष बाधित सड़कों को जल्द से जल्द खोला जाए और प्राथमिकता उन मार्गों को दी जाए, जो चिकित्सा और आपूर्ति के लिए अहम हैं।
ग्रामीणों की परेशानियां:
ग्रामीणों को मुख्य बाज़ार, स्कूल, अस्पताल और कृषि कार्यों तक पहुंचने के लिए लंबा पैदल सफर तय करना पड़ रहा है। कुछ क्षेत्रों में दूध, सब्जी और राशन जैसी जरूरी चीजों की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
गोपेश्वर से 12 किलोमीटर दूर स्थित गांव के निवासी कमल सिंह ने बताया:
“हमारी सड़क पूरी तरह टूट गई है। न तो बाजार जा सकते हैं, न स्कूल भेज पा रहे हैं बच्चों को। प्रशासन आए तो था, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।”
प्रशासन का बयान:
आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के एक अधिकारी ने बताया कि:
“21 मार्गों को जल्द से जल्द खोलने के प्रयास जारी हैं। जिन स्थानों पर लगातार बारिश और भूस्खलन हो रहा है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। जरूरत पड़ी तो वैकल्पिक मार्ग या अस्थायी पुलों की व्यवस्था भी की जाएगी।”
भविष्य की तैयारी:
जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में अब पूर्व चेतावनी तंत्र और सैटेलाइट निगरानी के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन ने सभी ग्राम प्रधानों और स्थानीय प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे समय पर सूचना दें और लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर भेजें।
