प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की त्रिनिदाद और टोबैगो यात्रा: भारतीय समुदाय से भावनात्मक जुड़ाव और सांस्कृतिक गौरव का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों अपनी पांच देशों की यात्रा पर हैं और घाना के बाद वह त्रिनिदाद और टोबैगो पहुंचे। इस द्वीपीय राष्ट्र में पहुंचने के साथ ही उन्होंने भारतीय मूल के लोगों से अपने गहरे संबंध को दर्शाते हुए भाषण की शुरुआत ‘सीताराम’ और ‘जय श्री राम’ के जयघोष से की। त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए उन्होंने आभार भी प्रकट किया।

भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने इस धरती की सुंदरता का जिक्र करते हुए कहा, “मैं इस खूबसूरत भूमि पर अभी-अभी आया हूं, जहां पक्षियों की चहचहाहट गूंजती है।” उन्होंने कहा कि यह स्वाभाविक है कि इस यात्रा का पहला संवाद भारतीय समुदाय के साथ हो, क्योंकि वे सब एक ही परिवार का हिस्सा हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय समुदाय की ऐतिहासिक यात्रा को याद करते हुए कहा कि यह केवल प्रवास नहीं था, बल्कि साहस, संघर्ष और संस्कृति की विजय यात्रा थी। उन्होंने कहा, “हमारे पूर्वजों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया, जो सबसे मजबूत आत्माओं को भी तोड़ सकती थीं। लेकिन वे डिगे नहीं, उन्होंने उम्मीद और हिम्मत के साथ हर कठिनाई का सामना किया।”

उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत से हजारों मील दूर होते हुए भी प्रवासी भारतीयों ने भारतीय संस्कृति को जीवित रखा। उन्होंने कहा कि “पूर्वजों ने गंगा और यमुना को पीछे छोड़ दिया, लेकिन रामायण को अपने दिलों में संजो कर रखा। वे मिट्टी छोड़ सकते थे, पर कभी भी नमक की निष्ठा नहीं छोड़ी।”

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि 25 साल पहले जब वे पहली बार त्रिनिदाद और टोबैगो आए थे, तब से आज तक भारत और इस देश के संबंध और भी मजबूत हुए हैं। उन्होंने यह उल्लेख किया कि त्रिनिदाद और टोबैगो में आज भी बनारस, पटना, कोलकाता और दिल्ली जैसे नाम देखने को मिलते हैं — न सिर्फ लोगों में, बल्कि सड़कों पर भी।

त्योहारों की बात करते हुए उन्होंने कहा कि नवरात्रि, महाशिवरात्रि और जन्माष्टमी जैसे पर्व यहां भी उसी उल्लास और गर्व के साथ मनाए जाते हैं जैसे भारत में। उन्होंने युवा पीढ़ी की उत्सुकता और सांस्कृतिक पहचान को लेकर जागरूकता की भी सराहना की।

अपने भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने भारतीय समुदाय की उपलब्धियों और देश के साथ उनके संबंधों को एक स्थायी सभ्यता के प्रतीक के रूप में दर्शाया। उन्होंने कहा, “हमारे रिश्ते सिर्फ भूगोल से नहीं, बल्कि दिलों से बंधे हुए हैं। ये संबंध पीढ़ियों को जोड़ते हैं, और यही हमारी असली ताकत है।”

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ना केवल राजनीतिक और राजनयिक महत्व रखती है, बल्कि यह भारतीय मूल के लोगों के लिए गर्व और आत्मसम्मान का एक भावनात्मक अवसर भी बन गई है। उनका संबोधन भारतीय संस्कृति की विश्वव्यापी उपस्थिति और उसके महत्व को एक बार फिर से रेखांकित करता है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.