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अंबुबासी मेला: श्रद्धा, साधना और संस्कृति का अनूठा संगम

गुवाहाटी स्थित मां कामाख्या धाम में अंबुबासी मेला पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। मेले के दूसरे दिन लाखों श्रद्धालु मंदिर परिसर में उमड़ पड़े, जहां साधना, तांत्रिक अनुष्ठान और मंत्रोच्चार की गूंज हर कोने में सुनाई दी। यह मेला केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है।

हर वर्ष जून माह में आयोजित यह चार दिवसीय पर्व देवी कामाख्या के ऋतुकाल से जुड़ा होता है। मान्यता है कि इस दौरान देवी रजस्वला होती हैं, जिसके कारण मंदिर के गर्भगृह के द्वार तीन दिनों तक बंद रहते हैं। इस अवधि में संपूर्ण असम में खेती और धार्मिक अनुष्ठान रोक दिए जाते हैं। श्रद्धालु इसे “धरती माता के विश्राम” का समय मानते हैं।

चौथे दिन मंदिर का पट भव्य पूजा के साथ खोला जाता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु और साधक मां के दर्शन करते हैं। इस वर्ष मेले में 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। प्रशासन ने सुरक्षा, स्वास्थ्य, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद किया है।

मेले में साधु-संत, अघोरी और तांत्रिकों की उपस्थिति इसे एक विशिष्ट धार्मिक आयोजन बनाती है। साथ ही, स्थानीय व्यवसाय, पर्यटन और परिवहन को भी इससे बड़ी आर्थिक संजीवनी मिलती है। अंबुबासी मेला आस्था, संस्कृति और प्रकृति के गहन समर्पण का प्रतीक बन गया है।

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