नई दिल्ली। देश में बंद पड़ी कोयला खदानों की जमीन का बेहतर इस्तेमाल कर उन्हें पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और आर्थिक विकास का माध्यम बनाने की केंद्र सरकार की पहल को बड़ी उपलब्धि मिली है। कोयला मंत्रालय के अधीन कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) की ओर से विकसित डिजिटल टूल ‘सुविकल्प’ को स्कॉच गोल्ड अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार 26 सितंबर को ‘डिजिटल परिचालन दक्षता-आंकड़ा आधारित निर्णय’ श्रेणी में प्रदान किया गया।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य बंद कोयला खदानों को केवल अनुपयोगी जमीन के रूप में छोड़ने के बजाय उन्हें विकास से जुड़ी उपयोगी परिसंपत्तियों में बदलना है। इसके लिए ‘सुविकल्प’ डिजिटल टूल तैयार किया गया है, जो तकनीकी, पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक मानकों के आधार पर खदानों के पुनः उपयोग से जुड़ी परियोजनाओं का आकलन करता है। यह टूल विभिन्न परियोजनाओं की उपयोगिता समझने और प्राथमिकता तय करने में भी मदद करता है।
परियोजनाओं के क्रियान्वयन में मिलेगी मदद
किसी परियोजना के चयन के बाद उसे जमीन पर उतारने की योजना बनाने के लिए प्रिज्म (पोस्ट-माइनिंग रिपर्पजिंग इम्प्लीमेंटेशन स्ट्रैटेजी मॉडल) का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें परियोजना की अवधारणा, क्रियान्वयन की प्रक्रिया, सफल उदाहरण, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के नमूने, निविदा दस्तावेज और संबंधित क्षेत्रों में काम करने वाली एजेंसियों की जानकारी उपलब्ध है। इससे परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें व्यवस्थित ढंग से लागू करने में सहायता मिल सकती है।
12 वेबिनार में रोजगार और पर्यटन पर चर्चा
सीसीओ ने खदानों को बंद करने और उनके पुनः उपयोग से संबंधित जानकारी साझा करने के लिए ‘सुविकल्प संवाद’ नाम से वेबिनार शृंखला भी आयोजित की। इसके तहत 12 विषयगत वेबिनार हुए। इनमें पर्यावरण बहाली, समुदाय की भागीदारी, पर्यटन एवं गंतव्य विकास, आजीविका के अवसर, परियोजना प्रबंधन, वित्तपोषण और परित्यक्त खदानों में जलभराव वाले क्षेत्रों के नए उपयोग जैसे विषयों पर चर्चा की गई। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी साझा किए गए।
मंत्रालय के अनुसार, इस पहल से खदानों को बंद करने की प्रक्रिया को केवल नियमों के पालन तक सीमित रखने के बजाय पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदायों के विकास और रोजगार सृजन से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे कोयला खनन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर विकसित करने और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा सकेगा।
