“नैनीताल से कैंची धाम तक श्रद्धालुओं का सैलाब, जाम में फंसे वाहन”

नैनीताल। सरोवरनगरी नैनीताल एवं कैंची धाम सहित नैनीताल जनपद के रामनगर सहित अधिकांश स्थानों पर सप्ताहांत पर सैलानियों का भारी दबाव रहा।

ऐसे में नैनीताल पुलिस ने वाहनों को रोक-रोककर आगे भेजने और शटल टैक्सियों के प्रयोग की रणनीति अपनायी। इसके बावजूद खासकर दोपहर तक कैंची धाम में वाहनों का भारी जाम रहा। इस दौरान सड़कों पर वाहनों के जाम के साथ कैंची धाम से लेकर नैनीताल के नयना देवी मंदिर में भी बिना किसी बड़े धार्मिक महत्व का दिन होने के बावजूद श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और लंबी-लंबी कतारें देखी गयीं।

जाम का यह रहा कारण

प्राप्त जानकारी के अनुसार दिल्ली व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र-एनसीआर के सैलानी शनिवार को भारी संख्या में कैंची धाम आ गये थे और रात्रि में पुलिस की गैर मौजूदगी में उन्होंने अपने वाहन कैंची धाम में आढ़े-तिरछे लगा दिये। जबकि रविवार को भी सुबह से ही भारी संख्या में दिल्ली-एनसीआर के ही सैलानी हजारों की संख्या में कैंची धाम की ओर अपने वाहनों से कूच करने लगे, लेकिन वहां आढ़े-तिरछे खड़े वाहनों के कारण जबर्दस्त जाम लग गया। ऐसे में पुलिस ने रानीबाग से लेकर भवाली, भीमताल व मस्जिद तिराहे आदि स्थानों पर मोर्चा संभाला और सैलानियों के वाहन रोककर उन्हें पहले तो रोक रोक कर आगे जाने दिया और फिर शटल टैक्सियों के माध्यम से कैंची धाम भेजा। इससे दोपहर बाद तक स्थितियां कुछ हद तक सामान्य हुईं लेकिन वाहनों का दबाव बना रहा। इधर नैनीताल में भी रूसी बाइपास और नारायण नगर में वाहनों को रोका गया।

ढांचागत सुविधाओं का विस्तार न होने से है मूल समस्या

राज्य सरकार और शासन-प्रशासन बरसों से कैंची धाम में लग रहे जाम की समस्या के समाधान के लिये ढांचागत सुविधाओं के विस्तार की बात कर रहा है, लेकिन धरातल पर कैंची धाम में एक बहुमंजिला वाहन पार्किंग का निर्माण शुरू होने के अतिरिक्त कोई कार्य नहीं हुआ है। इस पार्किंग के निर्माण के कारण भी कैंची धाम में वाहनों की पार्किंग क्षमता घट गयी है और इसके बनने तक लगभग एक वर्ष तक यह स्थिति बनी रहने की उम्मीद स्थानीय व्यवसायी जता रहे हैं। वहीं कैंची धाम का बाइपास केवल कागजों में ही आगे बढ़ रहा है। धरातल पर कुछ भी नहीं हुआ है, जिससे समस्या का समाधान हो सके। यही स्थिति रानीबाग में कलसिया पुल की है जो बरसों से अस्थायी वैली ब्रिज के रूप में चल रहा है। स्थायी पुल का निर्माण नहीं हुआ है। कुछ माह पूर्व केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा ने बैठक में यथा संभव स्थानों पर सड़क को चौड़ा करने के आदेश दिये थे, लेकिन प्रशासन चाहे रानीबाग में भीमताल के ‘बॉटल नेक’ तिराहे को चौड़ा करने की बात हो, चाहे काठगोदाम के गौला पुल से अमृतपुर तक प्रस्तावित बाइपास के निर्माण और चाले गुलाबघाटी में सड़क के चौड़ीकरण के लिये धरातल पर कार्य करने के नाम पर कुदाल तक प्रयोग नहीं कर पाया है। ऐसे में यात्रियों के लिये काठगोदाम से लेकर भुजियाघाट और अमृतपुर तक घंटों फंसना जैसे नियति बन गया है। यही स्थिति भवाली में मस्जिद तिराहे से शुरू हो जाती है और कैंची धाम से आगे तक जारी रहती है। इसमें न केवल सैलानी व श्रद्धालु फंसते हैं, वरन स्थानीय लोगों के लिये भी घर से आसपास निकलना भी मुश्किल हो गया है।

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