UPI से जुड़ेंगे बिम्सटेक देश, पीएम मोदी ने दिया खास प्रस्ताव

भारत के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है। इस समय सात देशों में यूपीआई का इस्तेमाल हो रहा है। इनमें भूटान, मॉरीशस, नेपाल, सिंगापुर, श्रीलंका, और फ्रांस शामिल हैं। अब जल्द ही बिम्सटेक मे शामिल देश भी इससे जुड़ सकते हैं। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए यूपीआई को बिम्सटेक देशों की भुगतान प्रणालियों के साथ जोड़ने की अपील की है। इसके अलावा पीएम मोदी ने भारत में बिम्सटेक चैंबर ऑफ कॉमर्स स्थापित करने समेत 21 सूत्री कार्ययोजना पेश की है।

हाल ही में थाईलैंड में संपन्न हुए छठवें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी ने सदस्य देशों को यूपीआई से जुड़ने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में व्यापार, कारोबार और पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने बिम्सटेक चैंबर ऑफ कॉमर्स की स्थापना करने, वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन आयोजित करने और क्षेत्र में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की संभावनाएं तलाशने का भी प्रस्ताव रखा।

बिम्सटेक को मजबूत करने और आपसी सहयोग बढ़ाना पर बल

मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘बिम्सटेक को मजबूत करना और आपसी सहयोग बढ़ाना बेहद जरूरी है। इस संदर्भ में मैंने विभिन्न पहलुओं को शामिल करते हुए 21 सूत्रीय कार्ययोजना का प्रस्ताव रखा है।’

मोदी ने बेंगलूरु में नवनिर्मित बिम्सटेक एनर्जी सेंटर का भी जिक्र किया, जो ऊर्जा क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षित करेगा। उन्होंने पूरे क्षेत्र में इलेक्ट्रिक ग्रिड इंटरकनेक्शन पर तेजी से काम करने का भी आग्रह किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘इसके अतिरिक्त, मैं बिम्सटेक क्षेत्र में भुगतान प्रणालियों के साथ यूपीआई को जोड़ने का प्रस्ताव रखता हूं। इससे सभी स्तरों पर व्यापार, उद्योग और पर्यटन को लाभ होगा। पीएम मोदी ने कहा कि मैं बिम्सटेक क्षेत्र में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए व्यवहार्यता अध्ययन कराने का भी सुझाव देता हूं।’

बिम्सटेक के दायरे और क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि बिम्सटेक दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाले पुल का कार्य करता है। यह क्षेत्रीय संपर्क, सहयोग और समृद्धि के नए रास्ते खोलने के लिए प्रभावी मंच के रूप में उभर रहा है। पीएम मोदी ने बिम्सटेक समूह के दायरे और क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने गृह मंत्रियों के तंत्र को संस्थागत बनाने की पहल की सराहना की। साथ ही भारत में पहली बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा।

बिम्सटेक में गठन के बाद से प्रगती ना के बराबर

बिम्सटेक ने 1997 में अपने गठन के बाद से आर्थिक सहयोग या सीधे आपसी संपर्क में बहुत अधिक प्रगति नहीं की है। मौजूदा शिखर सम्मेलन में समूह में गतिशीलता लाने के तरीकों पर भी जोर दिया गया। सदस्य देशों के नेताओं ने क्षेत्र की सामूहिक समृद्धि के लिए रोड मैप वाले बैंकॉक विजन 2030 दस्तावेज को अपनाया।

बिम्सटेक भारत के नेतृत्व पर निर्भर

बिम्सटेक देशों में भारत का दबदबा कायम है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस समूह को पीएम मोदी की नीतियों और सोच ने बड़ा आकार दिया है। बिम्सटेक समूह अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भारत के नेतृत्व पर निर्भर है। भारत के नेतृत्व में प्रधानमंत्री का पड़ोस पहले नीति, एक्ट ईस्ट नीति, महासागर विजन और इंडो-पैसिफिक के लिए विजन पर ध्यान समूह को गतिशीलता प्रदान करता है। भारत ने बहुपक्षीय कार्य का व्यापक अनुभव रखने वाले राजनयिक इंद्र मणि पांडे को महासचिव नियुक्त किया है। भारत ने बिम्सटेक सचिवालय को एक मिलियन अमेरिकी डॉलर दिए हैं।

इसके अलावा भारत के नेतृत्व में बिम्सटेक का एजेंडा कई गुना फैला है। बिम्सटेक कार्य क्षेत्र को सात भागों में बांटा गया है। इसमें प्रत्येक देश एक भाग का नेतृत्व करता है – भारत सुरक्षा क्षेत्र का नेतृत्व करता है। अन्य खंड व्यापार, निवेश और विकास (बांग्लादेश), पर्यावरण और जलवायु (भूटान), कृषि और खाद्य सुरक्षा (म्यांमार), लोगों से लोगों का संपर्क (नेपाल), अंतरिक्ष और प्रौद्योगिकी और नवाचार (श्रीलंका), और कनेक्टिविटी (थाईलैंड) पर है।

Leave a Reply