सर्वश्रेष्ठ राज्य बनेगा उत्तराखंड!

उत्तराखंड (Uttarakhand) को नए राज्य का दर्जा मिले करीब 22 साल पूरे हो गए हैं। उत्तराखंड के साथ ही छत्तीसगढ़ और झारखंड इन दिनों को नए राज्य के रूप में केंद्र ने अपनी मंजूरी दी थी। यह सच है कि अलग राज्य बनने के बाद से तीनों ही राज्य अपने हिसाब से निरंतर तरक्की कर रहे हैं। जहां तक सवाल उत्तराखंड का है, यहां आय के स्रोत अनगिनत हैं इन स्रोतों को जमीन पर उतारकर अमली जामा  पहनाने की आवश्यकता है। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से प्रदेश में कांग्रेस (Congress) और भाजपा (BJP ) दोनों की ही सरकारें बनी और दोनों ने अपने अपने हिसाब से राज्य के विकास की रूप रेखा का प्रारूप तैयार किया है। झारखंड ( jharkhand)  और छत्तीसगढ़ ( Chhattisgarh) के मुकाबले उत्तराखंड भी विकास के मामले में कम नहीं है।  

उत्तराखंड में  राजनीतिक अराजगता  हावी नहीं  हो तो यह प्रदेश अन्य राज्यों के मुकाबले  काफी उन्नति कर सकता है। लेकिन प्रदेश में चल रही घटिया राजनीति ने उत्तराखंड को काफी डिस्टर्ब कर रखा है जिससे इस राज्य का विकास रूक रूक कर प्रभावित होता रहता है। विकास को लेकर भाजपा और कांग्रेस में आरोप प्रत्यारोप भी  खूब लगते रहते हैं। इससे आम जनता भ्रमित होती रहती है। लेकिन सच्चाई यह है कि राज्य गठन के बाद से उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में विकास कार्य हुए हैं। हां राजनीतिक अराजगता की वजह से विकास कार्यो पर असर भी पड़े हैं। एक सबसे बड़ी समस्या यह है कि जो भी पार्टी सत्ता में रहती है, उसी के अंदर से सत्ता के खिलाफ आवाज बुलंद हो जाती हैं।

 ऐसा अक्सर ही देखने को मिलता रहता है। इसका सबसे ज्यादा फायदा  नौकरशाही उठाती है। यह बात अलग है कि अफवाहों में कोई दम नहीं होता है लेकिन इसका असर तो दूर तक पड़ता है। इस दौरान अफसर यह तलाशने में जुट जाते हैं कि अब सिंहासन पर कौन आएगा और उसका करीबी कौन है ताकि वहां तक अपनी पहुंच बनाई जा सके। इसके पीछे मलाईदार विभाग हड़पने का एकमात्र खेल होता है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि इस खेल में कोई राज नेता प्रभावित नहीं होता है बल्कि प्रदेश का विकास प्रभावित होता है।

उत्तराखंड में विकास के सारे संसाधन हैं। इसके लिए उत्तराखंड  किसी का मोहताज भी नहीं है। क्योंकि यहां ऊर्जा,पर्यटन और आयुष का भंडार है। बस, केवल जरूरत है इन सभी का वैज्ञानिक तरीके से दोहन करने का, जिस पर अमल आज भी नहीं हो पा रहा है। अकेले चारधाम यात्रा से  स्थानीय लोगों की काफी हद तक आर्थिकी सशक्त होती है। चारधाम यात्रा को ज्यादा से ज्यादा आरामदायक बनाने की दिशा में सरकार काम रही है लेकिन सरकार को इसमें और ज्यादा ताकत लगाने की आवश्यकता है। यात्रा के दौरान हर साल सड़कों की मरम्मत पर करोड़ों की धनराशि खर्च होती है।

यह धन राशि कम कैसे हो। इस पर सरकार को चिंतन करने  की जरूरत है।आपदा प्रबंधन का बजट हर साल बढ़ता रहता है। आल वेदर रोड को काफी पहले बनकर तैयार हो जाना चाहिए था भूस्खलन और समय पर फंडिंग नहीं होने के कारण  आल बेदर का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। हां, विकास को राजनीति से दूर रखना चाहिए। क्योंकि इसका प्रत्यक्ष प्रभाव भी पड़ता है  और  उत्तराखंड भी इससे अछूता अब नहीं रहा है। किसी भी पार्टी की सरकार क्यों नहीं हो, विकास को लेकर घिनौनी राजनीति किसी भी पार्टी या फिर राजनेता को नहीं करनी चाहिए। उत्तराखंड कम आबादी वाला छोटा सा प्रदेश है।

विकास की यहां प्रचुर संभावनाएं हैं। इस प्रदेश को अन्य राज्यों के मुकाबले फंडिंग भी ज्यादा है। क्यों कि यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट भी तेजी से चल हैं। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम को इस क्रम में देखा जा सकता है। खुद प्रधानमंत्री इन धामों में हो रहे विस्तार से जुड़े कार्यक्रमों की मॉनिटरिंग भी करते हैं। इस नजरिए से देखा जाए तो यहां विकास के लिए फंड की कमी नहीं है। केंद्र की फंडिंग  उत्तराखंड में जमकर हो रही है।

उत्तराखंड के विकास को लेकर हर व्यक्ति सजग है। वैसे भी विकास की कल्पना तभी संभव है जब सबका सहयोग मिले। विकास का विरोध विपक्ष को भी नहीं करना चाहिए।  यदि संयुक्त रूप से प्रयास किया जाए भविष्य में उत्तराखंड विकास के मामले में निश्चित रूप से अग्रणी राज्य की श्रेणी में शामिल हो सकता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि विकास की रफ्तार यूं ही आगे बढ़ती रहे ताकि उत्तराखंड यथाशीघ्र विकास के मामले में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाए।

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