बीमारियों से बचाव को दवा संग ‘मोटा अनाज’ भी जरूरी: डा. जोशी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मोटे अनाज को बढ़ावा देने की बात को पुख्ता कर रहे विशेषज्ञ

मंडुवा, झंगोरा, फाणा, कंडाली का साग, चेंसा आदि में भरपूर पोषक तत्व
फिट इंडिया मुहिम को सफल बनानें में भी मिलेट्स का उपयोग अहम

देहरादून । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मिलेट्स (मोटे अनाज) को बढ़ावा दिए जाने की बात को अब विशेषज्ञ भी पुख्ता कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मोटे अनाज के सेवन से शरीर स्वस्थ्य भी रहेगा और बीमारियां भी दूर होंगी।

खासकर, पहाड़ के पारंपरिक भोज्य पदार्थों में शामिल असरा, कंडाली का साग, फाणा, मंडझोली, चेंसा, कापली, स्वाला, मंडुवा, झंगोरा, भंगजीरा, चूड़ा तिल आदि ऐसे मिलेट्स हैं जो प्रोटीन, बिटामिन, कार्बोहाइड्रेट्स व कैल्शियम से भरपूर हैं।

इनके सेवन से शुगर, ब्लड प्रेशर, मोटापा, कब्ज आदि बीमारियां होने की संभावना बहुत कम रहती है और शरीर को स्टेमिना भी मिलती है। विशेषज्ञ इस बात पर भी जोर देते हैं कि फिट इंडिया मुहिम में भोजन में मिलेट्स का अधिकाधिक उपयोग अहम कदम साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ व वरिष्ठ फिजिशियन डा. केपी जोशी कहते हैं कि बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए जीवनशैली में सुधार करने के साथ ही डाक्टर से परामर्श के उपरांत दवाईयां भी जरूरी हैं। लेकिन दवाईयां बीमारियों को तब तक ही दूर रख सकती है जब तक व्यक्ति अपनी जीवनशैली में सुधार कर डाक्टर द्वारा बताए गए परामर्श का पालन करें।

बेहतर यह भी कि लोग अपने खान-पान पर विशेष ध्यान दें। भोजन में मोटे अनाज का उपयोग शरीर को स्वस्थ्य रखने का अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। डा. जोशी कहते हैं कि देश के कोने-कोने में उपलब्ध खाद्य पदार्थों के हिसाब से ही खाना बनाया जाता है।

जिसमें बर्तन में खाना बनाने से लेकर स्वादिष्ट खाना तैयार करना और उसको स्टोर करने के अलग-अलग तरीके हैं। इनमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन, मिनरल आदि की उपलब्धता अलग-अलग हो सकती है। पर शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए उन खाद्य पदार्थों का सेवन ठीक होता है जिनमें पोषक तत्वों की भरपूर उपलब्धता हो।

पहाड़ की पुरानी खाद्य परंपरा में ऐसे ही खाद्य पदार्थों से तैयार भोजन का  उपयोग कर शरीर को लंबे समय तक फिट रखा जाता था।
दाल, चावल, रोटी, सब्जी के साथ ही अरसा, कंडाली का साग, फाणा, चेसा, कापली आदि का सेवन कर लोग बीमारियों से मुक्त रहते थे। पनचक्की में तैयार होने वाला आटा पेट की बीमारियों के लिए बहुत लाभप्रद है।

पूर्व में लोग पनचक्की में तैयार होने वाले आटा का ही उपयोग करते थे। सिलबट्टे में पिसे मसाले भी शरीर को स्वस्थ्य रखने में कारगर साबित होते हैं। शरीर में खून की कमी को दूर करने के लिए लोहे के बर्तन में तैयार होने वाला खाना लाभप्रद होता है।

कांसा, तांबा व भडू में धीमी आंच में भोजन तैयार करना पहाड़ की पुरानी परंपरा रही है। क्योंकि ये बर्तन मिनरल के भी स्रोत हैं। माइक्रो व मैक्रो मिनरल शरीर में पाचन व मेटाबॉल्जिम क्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

डा. जोशी का कहना है कि वर्तमान में बाजार में बिकने वाला दूध व दूध से तैयार होने वाले अन्य उत्पाद भी मिलावटी हैं। इनका सेवन शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में मिलने वाला शुद्ध दूध, मट्टा व पल्तर विटामिन, मिनरल आदि की आपूर्ति शरीर को भरपूर मात्रा में करते हैं।

यह इसलिए भी कि वहां पर जानवर को दूषित चारा के बजाय प्राकृतिक चारा खिलाया जाता है। मोटा अनाज कोदा, झंगोरा, चौंसी, लाई, राई, चौलाई आदि शुगर के मरीजों के लिए वरदान है।

उनका कहना है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने और भोजन में मोटे अनाजों का अधिकाधिक उपयोग करने से कई तरह की बीमारियों से बचने के साथ ही शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ्य रखा जा सकता है।

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