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मोदी सरकार के कार्यकाल में बैंकों का कर्ज 365 प्रतिशत बढा

नयी दिल्ली। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि मोदी सरकार पिछले पांच साल में केवल 13 फीसदी यानी 1,32,000 करोड़ रुपए का कर्ज ही वसूल कर सकी और 10,09,510 करोड़ रुपए के वसूल नहीं किये जा सके कर्ज को बट्टे खाते में डाल दिया।

शेष कर्ज को बट्टे खो में डाल दिया और यह राशि वित्त वर्ष 2022-23 के राजकोषीय घाटे का लगभग 61 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि सरकारी बैंक बेधड़क बडे उद्योग पतियों को कर्ज में छूट दे रही है और उन्हें बेधड़क 70-80 प्रतिशत देनदारी से मुक्तकर रहे हैं। मोदी सरकार के कार्यकाल में बैंकों का कर्ज 365 प्रतिशत बढा है और जान बूझकर कर्ज नहीं चुकाने की राशि 23,000 करोड़ से बढ़ कर 2.4 लाख करोड़ हो गई है।

इस दौरान 38 पूंजीपतियों ने बड़े बैंक घोटाले किये और वे देश छोड़ कर भाग गये। प्रवक्ता ने कहा कि बैंक से कर्ज लोग घर ख़रीदने, गाड़ी खरीदने, पढ़ाई आदि के लिए लेते हैं और हर महीने किश्त चुका कर उसे अदा भी करते हैं।

अगर एक भी किश्त देने में लोग चूके तो बैंक के फोन जीना दूभर कर देगें और क्रेडिट रेटिग ख़राब हो जाएगी तथा आगे कभी लोन मिलने की उम्मीद भी ख़त्म हो जाती है। यदि एकाध महीने लगातार किश्त नहीं दी तो सरेआम बेइज्जत करने के लिए बैंक एक दो लठैत भी भेज देते हैं।

नाम का पोस्टर भी चिपका दिए जाएँगे, डरा धमका कर घर के आगे खड़ी गाड़ी भी खींच ली जाएगी। और अगर आप किसान हैं तो मुसीबत और भी बड़ी। प्राथमिकी दर्ज होगी, कचहरी में फोटो लगेगी और जेल जाना तय है। तीन महीने तक लगातार किश्त ना दे पाने की हालत में आपका लोन एनपीए घोषित हो जाता है।

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