किरन नेगी के हत्यारों के खिलाफ कार्रवाई को राष्ट्रपति को ज्ञापन

माले एवं आइसा नेताओं ने केंद्र एवं दिल्ली सरकार से की पुर्न विचार याचिका दाखिल करने की मांग

हल्द्वानी । आइसा और भाकपा (माले) ने राष्ट्रपति से किरण नेगी हत्याकांड के फैसले में हस्तक्षेप की मांग की है।

माले ने केंद्र व दिल्ली सरकार को किरण नेगी को न्याय दिलाने के लिए पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की भी मांग की है। माले ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी नहीं की गई है।

गौरतलब है कि 9 फरवरी 2012 को दिल्ली में दफ्तर से लौट रही किरण नेगी का हनुमान चौक, कुतुब विहार छवाला से अपहरण कर लिया गया था। तीन दिन बाद उसका शव बरामद हुआ था।

इसी बीच यह पुलिस जांच में सामने आया कि राहुल, उसके भाई रवि और एक अन्य व्यक्ति विनोद ने किरण नेगी का अपहरण किया और बलात्कार के बाद उसकी हत्या करके शव झज्जर में खेतों फेंक दिया।

फास्ट ट्रैक कोर्ट और दिल्ली उच्च न्यायालय ने आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई परंतु उच्चतम न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपियों को बरी कर दिया।

भाकपा (माले) नैनीताल जिला सचिव डा. कैलाश पांडेय ने कहा कि, कोई भी इस बात से इंकार नहीं कर सकता कि किरण नेगी का अपहरण करके हत्या कर दी गयी थी।

क्या इसे इंसाफ कहा जा सकता है कि एक युवती के अपहरण, बलात्कार और हत्या के प्रकरण में एक दशक के बाद सब आरोपित बरी कर दिये जाएं और किसी को कोई सजा न हो क्या हत्यारे और बलात्कारियों को कानून की पेचीदगियों का फायदा उठा कर खुला घूमने की अनुमति दी जानी चाहिए।

आइसा नेता दिव्या पनेरू का कहना है कि किरण नेगी को न्याय दिलाने के लिए सभी लोगों को एकजुट होकर केंद्र एवं राज्य सरकार पर दबाव बनाना चाहिए।

शनिवार को एक संयुक्त बैठक के माले और आइसा नेताओं ने लालकुआं तहसीलदार के माध्यम से एक ज्ञापन राष्ट्रपति को प्रेषित कर दिया है।

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