एमिबा इंसानी ब्रेन को खाने लगता है

नयी दिल्ली।यहां का एक बालक अजीब किस्म के संक्रमण से मरने के बाद वैज्ञानिकों ने आम लोगों के लिए नये सिरे से चेतावनी संकेत जारी किया है। अनुमान है कि यहां के लेक मीड नामक झील में यह एमिबा किसी कारण से पनप रहा है। इस खास किस्म के बैक्टेरिया का खतरा यह है कि वह किसी तरह इंसानी शरीर में प्रवेश करने के बाद उसके ब्रेन को खाने लगता है।

इसी वजह से एक खास समय सीमा के बाद इसकी वजह से संबंधित इंसान की मौत हो जाती है। इसके पहले भी कई अवसरों पर पानी के स्रोतों में इस किस्म के एमिबा के होने की पुष्टि हुई थी और तब भी लोगों को कुछ खास झीलों में जाने से मना किया गया था। तब भी कई लोग इसी एमिबा के शिकार बने थे। इस बार बालक की मौत के कारणों की जांच करने के बाद ही यह पाया गया है कि उसके ब्रेन में भी यह एमिबा मौजूद था। जिसने बालक के दिमाग का ढेर सारा हिस्सा खा लिया था।

शोधकतार्ओं के मुताबिक इससे प्रभावित पानी के झीलों में उतरने के बाद यह एमिबा नाक के रास्ते से शरीर में प्रवेश करता है। उसके बाद यह ऊपर की तरफ ब्रेन में पहुंच जाता है और वहां अपने अनुकूल भोजन की वजह से वह इंसानी मौत का कारण बनता है। दक्षिणी नेवेदा के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस एमिबा से ही बच्चे की मौत होने की पुष्टि कर दी है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक इंसानी ब्रेन को ही भोजन बनाने वाले इस बैक्टेरिया का वैज्ञानिक नाम नाइजलेरिया फोउलेरी है। इसका असर होने के बाद ब्रेन के कोष नष्ट हो जाता है। इसके बाद संबंधित मरीज का ब्रेन सूज जाता है और उसकी मौत हो जाती है। ऐसे एमिबा वाले झील का पानी पीने से कोई खतरा नहीं होता तथा यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह संक्रामक रोग भी नहीं है।

इसी अक्टूबर माह के पहले सप्ताह में लेक मीड जाने के बाद इस बच्चे पर उसका असर एक सप्ताह के बाद दिखना प्रारंभ हुआ था। जब तक उस एमिबा के शरीर के अंदर होने की जांच हो पाती, 18 साल के इस बच्चे की मौत हो गयी।इसके पहले भी कई अवसरों पर इस एमिबा के हमले का शिकार हो चुका है। दर्ज आंकड़ों के मुताबिक 1962 से 2021 के बीच अमेरिका में इसकी चपेट में आकर 154 लोगौं की मौत हुई है। संक्रमण होने के बाद सिर्फ चार लोग भी सकुशल बच पाये हैं।

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