पराली प्रबंधन के लिए पूसा बायो-डीकंपोजर के उपयोग पर जोर

नई दिल्ली ।कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कलेक्टरों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है । राज्यों के साथ बुधवार को केंद्र की मंत्रिस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक में श्री तोमर ने फसलों के अवशेष जलाये जाने पर चिन्ता व्यक्त की ।

बैठक में श्री तोमर के अलावा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव एवं मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला ने पराली जलाने से रोकने को लेकर बैठक में अत्यधिक गंभीरतापूर्वक राज्यों के साथ विचार-विमर्श किया।

इस दौरान कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि इस संबंध में प्रभावित जिलों में संबंधित राज्य सरकार द्वारा कलेक्टरों की जवाबदेही तय करने की जरूरत है, वहीं  यादव ने कहा कि राज्यों को तत्काल प्रभावी उपायों पर अमल करना चाहिए। रूपाला ने पंजाब में पराली जलाने की समस्या के लिए विशेष रूप से सक्रियता पर बल दिया।

उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी व तीनों केंद्रीय मंत्रालयों के उच्चाधिकारियों के साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली और एनसीआर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग, विद्युत मंत्रालय तथा अन्य केंद्रीय मंत्रालयों तथा विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में कहा गया कि राज्यों को केंद्र ने पिछले चार वर्षों के दौरान पहले से आपूर्तित 2.07 लाख मशीनों व चालू वर्ष के दौरान आपूर्ति की जाने वाली 47 हजार मशीनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने की जरूरत है। फसल अवशेष प्रबंधन पर केंद्रीय योजना के तहत सरकार पहले से ही पंजाब, हरियाणा, उ.प्र. और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को पराली जलाने के कारण दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।

चालू वर्ष के दौरान केंद्र द्वारा अब तक 601.53 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं। साथ ही, पिछले चार साल में दी गई राशि में से भी करीब 900 करोड़ रु. राज्यों के पास उपलब्ध है। बैठक में, राज्यों को पराली प्रबंधन के लिए केन्द्र सरकार द्वारा प्रदान की गई इस धनराशि का प्रभावी ढंग से उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

तोमर ने कहा कि राज्यों को पराली के प्रभावी इन-सीटू अपघटन के लिए पूसा संस्थान द्वारा विकसित बायो-डीकंपोजर के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्यों की अपेक्षाओं को पूरा करने की दिशा में केंद्र सरकार ने अपने दायित्वों का निर्वहन करने की पूरी कोशिश की है।

राज्य सरकारें भी इसी तरह शिद्दत से काम करें तो इसके अच्छे परिणाम आएंगे। विशेषकर, पंजाब के अमृतसर व तरनतारण जिलों में पराली जलाने पर प्रभावी नियंत्रण कर लिया जाएं तो 50 प्रतिशत उपलब्धि हासिल हो जाएंगी, क्योंकि इन दो जिलों में सर्वाधिक समस्या विद्यमान है।

इन चारों राज्यों में प्रभावी नियंत्रण से अन्य राज्यों में भी समस्या का विस्तार नहीं होगा। योजनाबद्ध तरीके से समग्र प्रयासों से काम करने पर पशुओं के लिए चारे की भी उपलब्धता में आसानी होगी। श्री तोमर ने बताया कि चार नवंबर को पूसा, दिल्ली में कार्यशाला की जा रही है, जिसमें पंजाब व आसपास के किसानों को इसी निमित्त बुलाया गया है, पंजाब के वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल हों ताकि पूसा डी-कंपोजर को लेकर उनका भ्रम दूर हो सकें।

Leave a Reply