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समझिए विक्रम को

वह लड़का जैसा सुन्दर है, वैसा ही सुशील और बैसा ही बुद्धिमान , आज ही तो उसने 31 वे साल में कदम रखा है और भ्रष्ट होती राजनीति में सुचिता ,सादगी और जनकल्याण की भावनाओं से आज के नेताओं को रूबरू करा दिया है ! उनके चेहरों से जन सेवक, जन हितैषी होने का दिखावटी नकाब तार -तार कर दिगम्वर कर दिया है ! हम बात कर रहे है शहर के प्रथम नागरिक विक्रम आहके की …आज इस नौजवान ने वह कर दिखाया जो मौजूदा राजनेताओं में देखने को नही मिलता और ना ही इसकी कल्पना कोई कर सकता था ? उनके इस कर्म से ऐसा स्पष्ट मालूम होता है कि आने बाले समय में वह सफल राजनैतिग्य होगा …. कहावत भी है ‘होनहार बिरवान के होत चीकने पात’
विक्रम के अभिन्न साथी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया की विक्रम भाई ने आपने सभी साथियों ,नगर पालिका निगम के कर्मचारियों ,अधिकारीयों व उनके चाहने वालों और नगर की जनता से चुन कर आये कांग्रेस पार्टी के 28 पार्षदों को साफ़ साफ़ शब्दों में चेता दिया था की बेवजह की फिजूलखर्ची ,दिखावा और चापलूस गिरी से दूर रहे !

मौजूदा समय की राजनीति में इस तरह की सोच देखने-सुनने में बड़ी अजीब और पागलपन जैसी प्रतीत होती है ? क्योंकि राजनीती में नेता अपने को ज्यादा से ज्यादा प्रचारित प्रसारित करने के लिए तरह तरह के हथकंडों का सहारा लेते है और ले रहे है ! चाहते तो उनके साथी , नगरपालिका निगम या फिर उनके शुभचिंतक उन्हें बधाई देने और अपना नाम महापौर के साथ प्रचारित प्रसारित करने के लिए होड़ लगा देते , शहर होल्डिंग्स से पट जाता ,समाचार पत्रों और इलेक्ट्रानिक मीडिया के बुध्धू बक्से दिन भर अतिश्योतियों से गीत गाते सुनाई पड़ते ..तो क्या ऐसे में कोई बड़ा नेता बनता है या अपने कर्म और ऊँची सोच से ….अब आप ही सोचिये ? इस यक्क्ष प्रश्न के साथ हम आपसे बिदा लेते है …

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