हवाई जहाजों के रख-रखाव का प्रमुख केन्द्र बनेगा उत्तर प्रदेश,  भारत में फिलहाल इस तरह की कोई सुविधा नहीं

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य को हवाई जहाजों के रखरखाव का प्रमुख केन्द्र बनाने के प्रस्ताव को को मंजूरी प्रदान कर दी।

बैठक के बाद लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि मंत्रिपरिषद की बैठक में नागरिक उड्डयन विभाग की ओर से उत्तर प्रदेश में हवाई जहाजों के रखरखाव, मरम्मत और दुरुस्त (मेंटेनेंस, रिपेयर एवं ओवरहाल) करने का हब बनाने के संबंध में प्रस्ताव पेश किया गया था।

इस प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इसके पारित होने के बाद विभाग इस दिशा में एक नीति बनाकर काम शुरु करेगा। उन्होंने बताया कि फिलहाल भारत में इस तरह की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण देश के हवाईजहाजों को रखरखाव आदि के लिये विदेश ले जाना पड़ता है।

यह काफी खर्चीला साबित होता है। प्रसाद ने कहा कि नयी नीति लागू कर उप्र को हवाई जहाजों के रखरखाव के प्रमुख केन्द्र के रूप में विकसित करने का मंत्रिमंडल ने फैसला किया है। प्रसाद ने कहा कि अगले पांच सालों में देश के जहाजी बेड़े में लगभग 1000 नये वायुयान जुड़ेंगे।

इसे ध्यान में रखते हुए नयी नीति बनायी गयी है, जिसमें हवाई जहाजों के रखरखाव का केन्द्र विकसित करने के लिये सब्सिडी भी दी जायेगी। इसकी शुरुआत नोएडा से होगी जहां इस तरह का पहला हब बनाया जायेगा। मंत्रिपरिषद की बैठक में किये गये अन्य अहम फैसलों की जानकारी देते हुए प्रसाद ने बताया कि बैठक में कुल 15 प्रस्ताव पेश किये गये थे, इनमें से 14 प्रस्तावों को मंजूरी मिल गयी है।

इसके तहत प्रदेश में चार नये डाटा सेंटर पार्क स्थापित करने के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद ने मंजूरी दी है। ‘उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति 2021’ के अंतर्गत 04 नये डाटा सेंटर पार्क से जुड़े निवेश प्रस्तावों को प्रोत्साहन दिया जायेगा। इससे 15,950 करोड़ रूपये से अधिक के निवेश से 4 डाटा सेंटर पार्क की स्थापना की जा सकेगी। इससे लगभग 4 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रोजगार प्राप्त होंगे।

प्रसाद ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने वित्तीय वर्ष 2022 – 23 में 35 करोड़ पौधरोपण के लिए प्रदेश के सभी शासकीय विभागों एवं अन्य को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की पौधशालाओं से निशुल्क पौध उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इसका मकसद उत्तर प्रदेश में वन क्षेत्रों को बढ़ाना है।

 

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