तीर्थ यात्रा के दौरान घोड़ों के साथ हो रही क्रूरता और उनकी मौत मामले में सरकार से मांगा जवाब

नैनीताल।  उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने तीर्थ यात्रा के दौरान घोड़ों के साथ हो रही क्रूरता और उनकी मौत के मामले में दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार से तीन सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने कहा है।

याचिकाकर्ता गौरी मौलेखी आज अदालत में पेश हुई और मामले की पैरवी करते हुए कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग की तरह उपरोक्त तीर्थ स्थानों पर सीमित संख्या में तीर्थयात्री भेजने की मांग की। उन्होंने यात्रा मार्ग में घोड़े एवं खच्चरों के साथ हो रही क्रूरता के मामले को भी अदालत के समक्ष रखा।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सरकार की ओर से पेश जवाब में घायल जानवरों की चिकित्सा और ठहरने के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गयी है। दूसरी ओर सरकार की ओर से कहा गया कि यात्रा मार्गों पर घोड़ों और खच्चरों की निगरानी के लिये पर्याप्त सुविधा है।

विभिन्न जगहों में पशु चिकित्सकों की तैनाती की गयी है। इसमें और बढ़ोतरी की जा रही है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि बदरीनाथ धाम में प्रतिदिन 16000, केदारनाथ 13000, गंगोत्री 8000 और यमुनोत्री में प्रतिदिन 5000 तीर्थयात्री भेजने का प्रस्ताव है।

गौरीकुंड स्थित घोड़ा पड़ाव में 500 घोड़ों के लिये आश्रय स्थल तैयार किया गया है। यही नहीं केदारनाथ में लिनचोली में एक-एक हजार लीटर के दो सोलर गीजर भी स्थापित किये गये हैं। अदालत इससे सहमत नजर नहीं आयी और इसके बाद अदालत ने सरकार से विस्तृत जवाब पेश करने को कहा।

अंत में अदालत ने सरकार से पूरे मामले में विस्तृत जवाब पेश करने को कहा है। इससे पहले दायर याचिका में कहा गया कि यात्रा मार्ग पर घोड़ों के साथ क्रूरता हो रही है। घोड़ों की देखभाल के लिये कोई उचित व्यवस्था नहीं है। लगभग 600 घोड़ों की मौत हो गयी है।

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