योजनाओं का लाभ बच्चों तक पहुंचे : रेखा आर्य

कार्यक्रम के पहले दिन वक्ताओं ने बाल संरक्षण पर दिया जोर

देहरादून। उत्तराखंड महिला कल्याण विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आगाज बृहस्पतिवार को दीन दयाल उपाध्याय वित्त प्रशासन संस्थान,सुद्धोवाला में शुरू हुआ।

जिसमें गढ़वाल मंडल क़ी बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष तथा सदस्यों और किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य शामिल हुए।

इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण एवं बाल कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने बतौर मुख्य अतिथि वर्चुअली हिस्सा लिया।


इस खास मौके पर महिला सशक्तिकरण एवं बाल कल्याण मंत्री रेखा आर्य ने सभी बाल कल्याण समिति के सभी अध्यक्ष एवं सदस्यों तथा किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यों का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि बोर्ड और समिति के माध्यम से बच्चों को बेहतर संरक्षण प्राप्त होगा।


रेखा आर्य ने यह भी कहा कि आवश्यकता श्रेणी व विधि विरुद्ध श्रेणी के बच्चों के साथ संवेदनशीलता से व्यवहार किया जाए ।

उन्होंने कहा कि बोर्ड तथा समिति विभागीय योजनाओं का लाभ बच्चों तक पहुंचाने में मदद करें। योजनाओं का लाभ बच्चों तक पहुंचे,यह सरकार की जिम्मेदारी है। इस दिशा में सभी को फोकस करना होगा।

मंत्री ने वात्सल्य योजना को जनमुखी बनाने की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि यदि माता पिता की मृत्यु कोविड 19 अथवा अन्य बीमारियों से हुई हो किंतु चिकित्सक का प्रमाण नहीं हो तो ऐसे परिवारों से शपथ पत्र प्राप्त कर बच्चों को वात्सल्य योजना का लाभ प्रदान किया जा सकता है, इस आशय का प्राविधान भी किया गया है।

” प्रशिक्षण के जरिए ज्ञान और कौशल का विकास कर बाल कल्याण समिति एवं किशोर न्याय बोर्ड अपना कार्य बेहतर ढंग से कर पाएंगे।पंचायत प्रतिनिधि प्रशिक्षण को गंभीरता से लेते हैं । उनके क्षेत्र के कार्य भी बेहतर होते हैं। इसी प्रकार सी डब्ल्यू सी और जेजेबी में भी प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण को गंभीरता से लेकर बाल संरक्षण की बुनियाद मजबूत को मजबूत करने की जरूरत है। मेहनत से काम किया जाए तो सब कुछ संभव है। तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर सभी के लिए लाभकारी होगा।

हरिचंद्र सेमवाल, सचिव , महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास

विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान अपर सचिव नियोजन मेजर योगेन्द्र यादव ने बताया कि कोरोना के कारण बाल कल्याण समिति एवं किशोर न्याय बोर्ड की नियुक्तियां प्रभावित हुई लेकिन मंत्री के विशेष पहल से सारी कार्यवाही पूर्ण हुई तथा प्रशिक्षण भी शुरू हुआ है। योगेन्द्र यादव ने कहा कि पद को अपने ऊपर हावी नहीं होने दें तथा मानवता को सर्वोपरि रखकर बच्चों के प्रकरणों का हल निकालें। जैसे अपने परिवार में बच्चे रखे जाते हैं ।

वैसा ही व्यवहार आपके सामने आने वाले बच्चों से किया जाए। आत्मीय लगाव से ही बच्चे अपने मन की बात खोल कर बताएंगें।
उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ गीता खन्ना ने प्रशिक्षुओं से कहा कि राज्य के जन -जन से जुड़ने के लिए परीक्षा पर्व तथा पोक्सो संवेदीकरण कार्यशालाओं का आयोजन आयोग द्वारा किया जा रहा है। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा।

बच्चों की समस्याओं को स्थानीय स्तर पर हल करने के लिए समुदाय को मजबूत करने का कार्य बाल संरक्षण से जुड़ी सभी संस्थाओं तथा व्यक्तियों को करना चाहिए। बच्चों के साथ हमारा व्यवहार हमारी सभ्यता की ऊंचाइयों का परिचायक है।
जस्टिस वी के माहेश्वरी ने बाल अधिकारों के ऐतिहासिक विकासक्रम पर प्रकाश डालते हुए बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित अपने अनुभव बताए। उन्होंने कहा कि बच्चों को उनका हक दिलवाने के प्रति समर्पित होना होगा। जस्टिस अमर सरन ने कहा कि उत्तराखंड की बाल कल्याण समिति तथा किशोर न्याय बोर्ड पूरे देश के सामने आदर्श प्रस्तुत करते हुए बच्चों के लिए आदर्श राज्य बनाएगी।

महिला कल्याण विभाग की ओर से प्रदीप सिंह रावत ने मंत्री, अध्यक्ष बाल आयोग, जस्टिस वी के माहेश्वरी, जस्टिस अमर सरन, अपर सचिव नियोजन, समस्त प्रतिभागियों का धन्यवाद दिया। इस मौके पर महिला सशक्तिकरण एवं बाल कल्याण के सचिव हरिचंद सेमवाल तथा मोहित चौधरी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

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