उत्तरकाशी: तीनों विधान सभा सीटों पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ

चुनावी नतीजों ने बदला उत्तरकाशी का सियासी इतिहास

  • यमुनोत्री में निर्दलीय का शानदार प्रदर्शन
  • पुरोला में विपक्ष में बैठने का मिथक टूटा

उत्तरकाशी। उत्तरकाशी की तीनों विधानसभा सीटों पर इस बार चुनावी नतीजे दिलचस्प रहे। खासकर कांग्रेस के लिए जिले में विधानसभा चुनाव नतीजे निराशाजनक रहा। चुनाव परिणाम आने पर जिले की तीनों सीट पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया,जबकिं भाजपा ने पुरोला और गंगोत्री सीट जीतकर नया इतिहास रचा है।

यमुनोत्री विधानसभा सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी संजय डोभाल के लिए चुनाव खासा सुकूनभरा रहा। वो भी उस स्थिति में जब वे कांग्रेस से टिकट के प्रबल दावेदार होने पर भी टिकट पाने से वंचित रह गये थे। इस बार के विधानसभा चुनाव नतीजों में उत्तरकाशी जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर चुनावी इतिहास बदलकर रह गए।

गंगोत्री से उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पहली बार भाजपा लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करने में सफल रही है। इसके साथ ही राज्य में भाजपा सरकार बनाने जा रही है। इस तरह इस बार भी गंगोत्री का मिथक बरकरार रहा।

इस सीट पर गंगोत्री के पूर्व विधायक व कांग्रेस नेता विजयपाल सिंह सजवाण को भाजपा प्रत्याशी सुरेश चौहान ने मतों के बड़े अंतर से मात देकर इतिहास रचने का काम किया। गंगोत्री सीट पर आप प्रत्याशी व सीएम कैडिडेट कर्नल अजय कोठियाल को जनता ने पूरी तरह से नकार दिया है। उन्हें मात्र 5998 वोट मिले है तथा तीसरे स्थान पर रही।

इस सीट पर चुनाव लड़े अन्य प्रत्याशी 5 सौ से उपर वोट नहीं प्राप्त कर सके है। राज्य गठन के बाद पुरोला विधानसभा सीट पर भी ये मिथक आम था कि यहां जिस किसी भी दल का प्रत्याशी जीतता है, उसे विपक्ष में बैठना पड़ता है। लेकिन इस बार यहां से भाजपा प्रत्याशी दुर्गेवर लाल ने कांग्रेस के मालचंद को करारी शिकस्त देकर पुरोला की राजनीति में नया कीर्तिमान हासिल किया है।

राज्य में अब तक हुये चुनाव में यमुनोत्री विधानसभा सीट पर पहली बार भाजपा और कांग्रेस इतने लाचार दिखाई दिए। यहां कांग्रेस से दीपक बिजल्वाण और भाजपा से केदार सिंह रावत को संजय डोभाल के सामने करारी हार का सामना करना पड़ा है।

निर्दलीय संजय डोभाल ने करीब 6 हजार 340 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर कांग्रेस और भाजपा को खासा झटका दिया। इस तरह देखा जाय तो इस बार विधानसभा चुनाव के नतीजों में उत्तरकाशी जिले का सियासी इतिहास ही बदल कर रह गया है।

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