भाजपा :  अपनों से मिल रही चुनौती, विधायक उम्मीदवारी को लेकर जद्दोजहद

गोपेश्वर। भाजपा में दावेदारी को लेकर चल रही खींचतान के चलते चमोली के तीनों विधायक विपक्ष से नहीं अपितु इस बार अपनों की ही चुनौती से जूझ रहे हैं। इसके चलते विधायक चुनावी समर में जाने के बजाय अपनी उम्मीदवारी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।

भाजपा में हालांकि सब कुछ ठीक ठाक होने का दावा किया जाता रहा है किंतु मौजूदा चुनाव में भाजपा के इन दावों की हवा निकलती देखी जा रही है। चमोली के तीनों भाजपा विधायक इस समय विपक्ष के बजाय अपनों की ही चुनौती से जूझ रहे हैं। इसके चलते अपनी दावेदारी के लिए उन्हें जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

इसके बावजूद कोई भी विधायक अपनी दावेदारी को सुरक्षित मान कर नहीं चल रहा है। बद्रीनाथ विधान सभा सीट पर भाजपा विधायक महेंद्र प्रसाद भट्ट स्वाभाविक उम्मीदवार हैं। इसके बावजूद उन्हें भाजपा जिलाध्यक्ष रघुबीर सिंह बिष्ट, चमोली जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह रावत, जिला पंचायत सदस्य योगेंद्र सेमवाल, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष हरक सिंह नेगी, पूर्व राज्य मंत्री रिपुदमन सिंह रावत से चुनौती मिल रही है। हालांकि गाहे बगाहे विधायक ऋतु खंडूड़ी की बदरीनाथ लौटने की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं।

थराली विधान सभा की विधायक मुन्नी देवी शाह के खिलाफ भी भाजपाइयों ने मोर्चा खोला है। भाजपा के भूपाल राम, बलबीर उनियाल व नरेंद्र भारती ने विधायक मुन्नी देवी शाह की दावेदारी को चुनौती दी है।

यही वजह है कि मुन्नी देवी शाह की टिकट की राह भी आसान नहीं रह गई है। वह टिकट पाने के लिए अपनी प्रतिद्वंदियों से लगातार जूझ कर अपनी सुरक्षित दावेदारी की जद्दोजहद में लगी है।

कर्णप्रयाग विधायक सुरेंद्र सिंह रावत के अस्वस्थ होने के चलते तमाम दावेदार मैदान में उतर आए। हालांकि अब वह स्वस्थ होकर अपनी दावेदारी को दमखम ठोंक रहे हैं।

इसके बावजूद पूर्व विधायक अनिल नौटियाल, भाजपा राष्ट्रीय मीडिया टीएम के सदस्य सतीश लखेड़ा, भाजपा के वरिष्ठ नेता टीका प्रसाद मैखुरी, जिला पंचायत सदस्य विनोद कुमार सिंह नेगी, बीकेटीसी के सदस्य रहे अरुण मैठाणी, पूर्व जिला महामंत्री पंकज डिमरी, आरएसएस पृष्ठभूमि के कद्दावर नेता रमेश गडिया, भाजपा जिला महामंत्री समीर मिश्रा तथा राकेश रतूड़ी उनकी दावेदारी को चुनौती दे रहे हैं।

दावेदारी को लेकर भाजपा के तीनों विधायक देहरादून में रह कर अपने पक्ष में दबाव बना रहे हैं। इसके बावजूद विधायकों को चुनौती देने वाले ज्यादातर दावेदार देहरादून से दिल्ली तक भाजपा दिग्गजों की परिक्रमा कर अपने अपने पक्ष को मजबूती दे रहे हैं।

विधायकों की काट के लिए दावेदार तमाम तरह के तर्क देकर अपनी दावेदारी को पुख्ता रू प में प्रदर्शित कर रहे हैं। इस तरह के हालातों के चलते तीनों दावेदारों को विपक्षियों से लडऩे के बजाय अपनों से ही उलझना पड़ रहा है। हालांकि भाजपा की आंतरिक सर्वे में जिले की तीनों सीटों को बी ग्रेड में डाला गया था।

इसके चलते ही दावेदारों में आश बंधी और उन्होंने अपनी अपनी दावेदारी को लेकर रात दिन एक करना शुरू  किया। भाजपा की अंदरूनी राजनीति में दखल रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि विधायकों ने अपने 5 साल के कार्यकाल में कार्यकर्ताओं से न तो बेहतर संवाद बनाया और ना ही समन्वय।

इसके चलते ही उन्हें इस बार अपनों की ही चुनौती से जूझना पड़ रहा है। हालांकि इस समय किसी एक दल के पक्ष में कोई चुनावी लहर भी नहीं है। इसके बावजूद विधायकों के खिलाफ मोर्चा खोले दावेदार मौका छोड़ने को तैयार नहीं है।

ऐसे में चमोली भाजपा के तीनों विधायकों के सामने अपनी उम्मीदवारी को सुरक्षित रखने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। दावेदार भी है कि वे विधायकों के सामने घुटने टेकने को तैयार ही नहीं ऐसे में उम्मीदवारों का चयन होने तक चमोली जिले में भाजपा में चल रही खींचतान क्या गुल खिलाती है यह सब अगले कुछ दिनों में दिखाई देगा।

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