कैमरे के सामने सेवा, कैमरे के पीछे सौदा: क्या सच में समाजसेवा बन गई है पब्लिसिटी का कारोबार?
आज के समय में समाजसेवा का स्वरूप तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। जहां पहले सेवा का अर्थ निस्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद करना होता था, वहीं अब कई लोग इसे पहचान और प्रचार पाने का आसान माध्यम बना चुके हैं। कुछ तथाकथित समाजसेवी ऐसे भी हैं, जिनकी सेवा का दायरा कैमरे की फ्रेम से आगे बढ़ता ही नहीं।…
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