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गुरु

गुरु: अंधेरा दूर करने वाला – एक अनन्य शब्द का सरल और गहन अर्थ

सत्यनारायण मिश्र "गुरु" शब्द भारतीय संस्कृति का एक ऐसा रत्न है, जो न केवल देवभाषा संस्कृत और उसकी सहचरी भाषा हिन्दी की अनन्त गहराई को दर्शाता है, बल्कि मानव जीवन के उच्चतम आदर्शों का प्रतीक भी है। इसकी उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों "गु" (अंधेरा या अज्ञान) और "रु" (दूर करने वाला) से हुई है। इस…
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गुरुओं के आदर्शों पर पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ रहा है देश

नयी दिल्ली। देश पूरी निष्ठा के साथ गुरुओं के आदर्शों पर आगे बढ़ रहा है । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने  लालकिले पर गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व में शिरकत करते हुए ये उद्गार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि गुरुओं के आशीर्वाद से भारत अपने गौरव के शिखर पर पहुंचेगा जो अपनी प्रगति में विश्व की…
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बलिहारी-गुरु

सुशील उपाध्याय उनकी सुदीर्घ काया, सीने पर लहराती सफेद दाढ़ी, मोटे फ्रेम का चश्मा, लंबे डग भरते पांव और रौबीली आवाज सुनकर पहली निगाह में किसी भी छात्र को डर का अहसास होने लगता था। उनका नाम भी भारी भरकम था-भोपाल सिंह शर्मा पौलत्स्य! सिंह, शर्मा और पौलत्स्य, वे तीनों एक साथ थे। सुबह की प्रार्थना…
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