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आलेख

तीन राज्य, तीन घटनाएं : तीनों के पीछे संघ का एजेंडा

आलेख : जसविंदर सिंह तीन राज्यों में हाल में घटी घटनाएं वैसे तो अलग-अलग लगती हैं, लेकिन इन तीनों का स्रोत एक ही है l इसके पीछे आरएसएस का गुप्त नहीं, बल्कि घोषित एजेंडा है। भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार इसे लागू कर रही हैl यह घटनाएं हैं : महाराष्ट्र में कक्षा एक से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में लागू…
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कांवड़ यात्रा अब धार्मिक नहीं, बल्कि योजनाबद्ध राजनीतिक कार्यक्रम बन गयी है

(आलेख : महेंद्र मिश्र) कांवड़िये किस तरह से सड़कों पर उपद्रव कर रहे हैं वह चर्चा-ए-आम है। आए दिन मारपीट और हिंसा की घटनाएं सोशल मीडिया पर वायरल हैं। कहीं कांवड़ियों का कोई जत्था ढाबा तोड़ रहा है, तो कहीं कोई दुकान उनके निशाने पर है। कहीं किसी की कार तोड़ी जा रही है, तो कहीं हुड़दंगियों का यह…
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अब मतदाता सूचियों में विदेशी नामों का हौवा

 राजेंद्र शर्मा जिसकी आशंका थी, बिहार में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के पीछे के असली खेल का पर्दे के पीछे से झांंकना शुरू हो गया है। यह शुरूआत हुई है इसके दावों के साथ कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के क्रम में घर-घर जाने से मिल रही जानकारियों से पता चला है कि मतदाता सूची में बड़ी संख्या में…
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भागवत जी, आप भी…!

  राजेंद्र शर्मा ये क्या अपने मोदी साहब के साथ सरासर चीटिंग नहीं है? माने चीटिंग हो नहीं गयी है? मोदी साहब के साथ चीटिंग इतनी ही आसान है क्या? मोदी साहब जब तक खुद न चाहें, उनके साथ चीटिंग कर जाए, इतनी किस में हिम्मत है। फिर भी चीटिंग की कोशिश तो है। बताइए, मास्टर स्ट्रोक मोदी जी की खास निशानी है…
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भागवत जी के नाम मोदी का खुला खत

विष्णु नागर माननीय भागवत जी, अब तो आपने सबके सामने इशारे-इशारे में कह दिया है कि अगले 17 सितंबर को अपने 75 वें जन्मदिन पर मुझे झोला लेकर चल देना है। 75 की शाल ओढ़ कर मुझे दरकिनार हो जाना है, दूसरों को मौका देना है। बहुत खूब कहा। बहुत ऊंची सोच है आपकी। लगता है आपकी पतंग आजकल काफी ऊपर उड़ रही…
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सोशल मीडिया का प्रयोग: सामाजिक समरसता के लिए बनता चुनौती

डॉ रवि शरण दीक्षित वर्तमान परिवेश मे समाज के एक वर्ग की अभिव्यक्ति मे स्वतंत्रता ऐसे कार्यों पर दिखने लगी है, जिसका माध्यम सोशल मीडिया, इसका मूल आधार बनता जा रहा है जो समाज एक बड़े वर्ग तथा, परिवार, नागरिकों के बीच दूरी को बढ़ाते हैं तथा वैचारिक दुनिया को भ्रमित करने में भी सहायक हो रहा है इसके…
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अवार्ड तो लाने दो यारो!

राजेन्द्र शर्मा भगवा भाईयों ने भी मोदी जी के विरोधियों को वो मुंह तोड़ जवाब दिया है कि पूछो ही मत। एक-एक गिनकर, साल-महीनावार पूरी लिस्ट बनाकर बता दिया है कि मोदी जी को परदेस में कब-कब, कहां-कहां और कौन-कौन से अवार्ड मिले हैं। और यह भी कि मोदी जी से पहले वाले प्रधानमंत्रियों को परदेस में कितने…
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मतदाता सूची पुनरीक्षण या मताधिकार पर हमला?

राजेंद्र शर्मा यह अगर संयोग ही है, तब भी बहुत कुछ बताने वाला संयोग है। 25 जून को, जिस दिन बड़े जोर-शोर से 'संविधान हत्या दिवस' के नाम से मौजूदा शासन द्वारा इंदिरा गांधी की इमरजेंसी की पचासवीं बरसी मनायी जा रही थी, ठीक उसी रोज बिहार में, जहां अब से कुछ ही महीने में विधानसभा के चुनाव होने हैं,…
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इमरजेंसी के पचास साल : मीडिया या तानाशाही की आंखों पर बंधी पट्टी

आलेख : राजेंद्र शर्मा इंदिरा गांधी के जिस इमरजेंसी निजाम के अब पचास साल हो रहे हैं, उसकी एक प्रमुख निशानी बेशक उन कुख्यात इक्कीस महीनों में प्रेस का दमन और उसकी स्वतंत्रता का छीना जाना थी। खासतौर पर इमरजेंसी के शुरूआती दौर की याद करते ही हमें अखबारों और पत्रिकाओं के जगह-जगह से काले रंग से…
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