संसद में हंगामा, धरना और सियासी वार—राहुल गांधी को लेकर क्यों आमने-सामने आया सत्ता और विपक्ष?

लोकसभा में लगातार जारी हंगामे और आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन के बीच गुरुवार को संसद भवन में विपक्षी दलों के फ्लोर नेताओं की एक अहम बैठक आयोजित की गई। यह बैठक राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में हुई, जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल रहे। बैठक में संसद की मौजूदा स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।

इसी दौरान निलंबित विपक्षी सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार पर धरना प्रदर्शन किया। सांसदों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांग की कि राहुल गांधी को सदन में अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। निलंबित सांसदों ने साफ कहा कि जब तक राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने की अनुमति नहीं दी जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

इस पूरे घटनाक्रम पर सत्तापक्ष की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने केंद्रीय राज्य मंत्री रवीनीत सिंह बिट्टू को ‘गद्दार दोस्त’ कहा, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बिट्टू का परिवार आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में बलिदान दे चुका है। शिवराज ने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोध करते-करते राहुल गांधी अब देश का विरोध करने लगे हैं।

वहीं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ नेता केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए बयानबाजी करते हैं और विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देते हैं। पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर काम कर रहा है।

चिराग पासवान ने विपक्षी सांसदों के आचरण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सदन में सचिवालय की कुर्सी पर चढ़ना, कागज फाड़कर अध्यक्ष की ओर फेंकना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने याद दिलाया कि हाल ही में एनडीए संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने संसद की गरिमा बनाए रखने पर विशेष जोर दिया था। पासवान के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष के अहंकार और जिद के कारण विपक्ष खुद कमजोर होता जा रहा है।

फिलहाल संसद के भीतर और बाहर सियासी तनाव बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस टकराव के और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

 

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