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यूजीसी के नए नियमों से छात्र क्यों परेशान? विशाखा चौधरी ने उठाए गंभीर सवाल

नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए नियमों को लेकर देशभर के विश्वविद्यालय परिसरों में छात्रों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल देखा जा रहा है। ग्लोबल ह्यूमन राइट्स एंड सोशल जस्टिस काउंसिल की इंडिया हेड (सोशल वेलफेयर) विशाखा चौधरी ने इन प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों के अधिकारों की रक्षा से जुड़े किसी भी नियम की नींव न्याय, निष्पक्षता और पारदर्शिता पर आधारित होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में पहले से ही आंतरिक शिकायत समिति, समान अवसर प्रकोष्ठ, एंटी-रैगिंग कमेटी और ग्रिवांस पोर्टल जैसी व्यवस्थाएँ मौजूद हैं। ऐसे में बिना स्पष्ट प्रक्रिया बताए एक नया ढांचा लागू किया जाना छात्रों में भ्रम और असुरक्षा की भावना पैदा कर रहा है।

विशाखा चौधरी ने स्पष्ट किया कि उनकी चिंता किसी समुदाय या वर्ग विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह **प्रक्रियागत संतुलन और निष्पक्ष न्याय** से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था आवश्यक है, लेकिन साथ ही आरोपों का सामना कर रहे छात्र के अधिकार, साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच और अपील की स्पष्ट प्रक्रिया भी उतनी ही जरूरी है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन पहलुओं पर समय रहते स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए, तो इसका असर कैंपस में आपसी विश्वास, भाईचारे और स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण पर पड़ सकता है। काउंसिल ने शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी से मांग की है कि नए नियमों की आवश्यकता, उद्देश्य और उनके संवैधानिक आधार को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए।

 

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