देहरादून। मुख्यमंत्री धामी ने सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट में आयोजित दो दिवसीय **चिंतन शिविर एवं डॉयलॉग ऑन विजन 2047** में राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब प्रत्येक राज्य समान रूप से आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प में विकसित उत्तराखंड की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप यह शिविर केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि ठोस, व्यवहारिक और समयबद्ध रणनीति तैयार करने का प्रयास है। इसमें उत्तराखंड के शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, कृषि, उद्योग, ऊर्जा, तकनीक और सुशासन जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर गहन मंथन किया जा रहा है, ताकि राज्य के दीर्घकालिक विकास की स्पष्ट दिशा तय की जा सके।
सीएम धामी ने प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका को अत्यंत अहम बताते हुए कहा कि नीति निर्माण से लेकर उसके प्रभावी क्रियान्वयन तक प्रशासन की सक्रियता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता ही सफलता तय करती है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे अपने कार्यों को केवल फाइलों और बैठकों तक सीमित न रखें, बल्कि परिणाम आधारित और जन-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ काम करें। योजनाओं का मूल्यांकन केवल बजट खर्च से नहीं, बल्कि उनके वास्तविक आउटपुट और आउटकम से होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखंड के सामने विशेष चुनौतियां हैं, लेकिन इन्हीं में विकास के अवसर भी छिपे हैं। इकोनॉमी और इकोलॉजी के बीच संतुलन बनाते हुए राज्य देश को नई दिशा दे सकता है। इसके लिए विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर “टीम उत्तराखंड” के रूप में कार्य करना होगा।
उन्होंने विकसित उत्तराखंड की नींव को तीन स्तंभों—सुशासन, तकनीक एवं नवाचार और जन-केंद्रित सतत विकास—पर आधारित बताया। ई-गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से शासन को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही यह भी कहा कि तकनीक की पहुंच दूरस्थ और सीमांत गांवों तक सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उद्घाटन सत्र के बाद मुख्यमंत्री स्वयं हॉल में बैठकर विभिन्न विषयों पर चल रही परिचर्चा में शामिल हुए और सुझावों को नोट करते रहे। इस अवसर पर सेतु आयोग, नीति आयोग, वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।