वैश्विक टेक सहयोग की ओर उत्तराखंड: IIT रुड़की–इंडस्ट्री पार्टनरशिप से बदलेगा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम

देहरादून। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने नवाचार, स्टार्ट-अप्स और वैश्विक प्रौद्योगिकी सहयोग को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। इस क्रम में आईआईटी रुड़की ने इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी नवाचार-आधारित विकास, प्रौद्योगिकी वाणिज्यीकरण और उद्योग–शैक्षणिक सहयोग को नई गति देने वाली मानी जा रही है।

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य डीप-टेक नवाचार, स्टार्ट-अप मेंटरिंग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और बाज़ार-उन्मुख अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है। आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर अभ्यानंद सिंह मौर्य के मार्गदर्शन में संपन्न इस साझेदारी के तहत प्रारंभिक चरण के स्टार्ट-अप्स को मार्गदर्शन, संसाधन और उद्योग से जुड़ा समर्थन उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि अकादमिक शोध को व्यावसायिक और समाजोपयोगी समाधान के रूप में विकसित किया जा सके।

यह सहयोग राष्ट्रीय स्तर पर आत्मनिर्भर भारत, स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी पहलों के अनुरूप है। साथ ही यह वैश्विक स्तर पर सतत नवाचार, उद्यमिता और ज्ञान-आधारित आर्थिक विकास को भी सशक्त करेगा। इसके माध्यम से आईआईटी रुड़की के शोधार्थियों, नवाचारकों और उद्यमियों को वैश्विक बाजारों तक पहुँचने के अवसर मिलेंगे।

आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत ने इस अवसर पर कहा कि यह साझेदारी संस्थान के उस दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसके अंतर्गत अत्याधुनिक शोध को वास्तविक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव में बदला जा रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योग और स्टार्ट-अप्स के साथ मजबूत जुड़ाव से ऐसा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा, जिसमें प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकें सीधे समाज और उद्योग तक पहुँच सकेंगी।

वहीं इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री संजय कॉमेरा ने कहा कि आईआईटी रुड़की जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान के साथ यह समझौता उनके लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अनुसंधान-आधारित विचारों को स्केलेबल प्रौद्योगिकियों और सफल स्टार्ट-अप्स में बदलने की प्रक्रिया तेज होगी। यह सहयोग अकादमिक जगत, उद्योग और उद्यमियों के बीच सार्थक साझेदारी को बढ़ावा देगा और भारत को वैश्विक नवाचार मानचित्र पर और मजबूत बनाएगा।

 

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