केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तमिल भाषा को भारत की प्राचीनतम और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताते हुए कहा कि तमिल न केवल एक भाषा है, बल्कि भारतीय एकता और सांस्कृतिक चेतना की मजबूत पहचान है। उन्होंने कहा कि तमिल भाषा सदियों से भारत की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध करती आ रही है और आज यह राष्ट्रीय एकीकरण का सशक्त माध्यम बन चुकी है।
काशी तमिल संगमम के समापन समारोह में शामिल होने के बाद मदुरै में पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिल भाषा और संस्कृति के प्रति गहरा सम्मान रखते हैं। उन्होंने तिरुवल्लुवर के महान ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ के विचारों को आत्मसात किया है, जो संपूर्ण मानवता के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश के लिए गर्व की बात है, लेकिन दुर्भाग्यवश कुछ लोग इस विषय पर भी राजनीति करने से नहीं चूक रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार बीते चार वर्षों से काशी तमिल संगमम का सफल आयोजन कर रही है, जिससे देशभर के लोग तमिल संस्कृति, साहित्य और परंपराओं से परिचित हो रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर भारतीय को देश की प्राचीन भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को जानना चाहिए।
तमिलनाडु की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य की सत्ताधारी डीएमके सरकार सांस्कृतिक विषयों पर भी राजनीति कर रही है। उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु के लोग नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन राजनीतिक कारणों से राज्य सरकार इसे लागू नहीं कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह स्थिति बदलेगी और तमिलनाडु भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाएगा।