इंडिगो में आखिर क्या हुआ? 1,000 फ्लाइट रद्द होने के बाद अब हालात कैसे सुधर रहे?

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो पिछले कुछ दिनों से गंभीर अव्यवस्था का सामना कर रही है, जिसके कारण हवाई यात्रा बुरी तरह प्रभावित हुई। दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर, इंदौर और तिरुवनंतपुरम जैसे प्रमुख एयरपोर्ट्स पर यात्रियों को घंटों देरी और फ्लाइट कैंसिलेशन झेलना पड़ा। हजारों लोग एयरपोर्ट्स पर फंसे रहे और हालात काफी तनावपूर्ण बने रहे।

हालांकि, देर रात दिल्ली एयरपोर्ट अथॉरिटी ने एक एडवाइजरी जारी कर कहा कि इंडिगो का ऑपरेशन धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, विमानन नियामक डीजीसीए ने इंडिगो को कई महत्वपूर्ण छूटें दीं, जिनकी मदद से एयरलाइन अधिक पायलटों को ड्यूटी में लगा सकती है और उड़ान संचालन को सामान्य बनाने की दिशा में तेजी से काम कर सकती है।

इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने भी देर रात बयान जारी कर यात्रियों से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि 10 से 15 दिसंबर के बीच स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। एल्बर्स ने बताया कि शनिवार को रद्द होने वाली उड़ानों की संख्या 1,000 से कम रहेगी, जबकि शुक्रवार को एयरलाइन 1,000 से अधिक उड़ानें रद्द कर चुकी थी। यह संख्या इंडिगो की कुल दैनिक उड़ानों का लगभग आधा हिस्सा है।

उधर, फ्लाइट संकट के कारण हवाई किराए में जबरदस्त उछाल देखा गया। कुछ रूट्स पर टिकट दाम सामान्य से तीन से चार गुना बढ़ गए। कोलकाता-मुंबई रूट पर स्पाइसजेट की इकॉनमी टिकट 90,000 रुपये तक पहुंच गई, जबकि एयर इंडिया की मुंबई-भुवनेश्वर उड़ान का किराया 84,485 रुपये दर्ज किया गया।

इंडिगो भारत के कुल घरेलू हवाई ट्रैफिक का करीब दो-तिहाई हिस्सा संभालती है और प्रतिदिन लगभग 2,300 उड़ानें संचालित करती है। पायलटों और क्रू की कमी के कारण लगातार चौथे दिन इसकी सेवाएं बाधित रहीं। DGCA की राहत के बाद उम्मीद है कि आने वाले दिनों में उड़ानें फिर से सामान्य रफ्तार पकड़ेंगी और यात्रियों की असुविधा कम होगी।

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