पांच महीने में आधे से कुछ ज्यादा म्यांमार ऱिफ्यूजी का ही हो सका बायोमेट्रिक पंजीकरण

मिजोरम के 11 जिलों में रह रहे हैं 32000 के लगभग चिन-जो
तकनीकी कारणों से हो रही है देरी
सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
आईजोल। मिजोरम सरकार ने म्यांमार से आए 31,214 शरणार्थियों के बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राज्य के गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार अब तक 58.15 प्रतिशत, 18,000 से कुछ अधिक शरणार्थियों का डेटा फॉरेनर्स आइडेंटिफिकेशन पोर्टल एंड बायोमेट्रिक एनरोलमेंट सिस्टम के माध्यम से दर्ज हो सका है। यह प्रक्रिया इस साल जुलाई के दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर शुरू हुई थी। इस बीच बांग्लादेश के चटगांव हिल्स ट्रैक्ट्स से आए 2354 शरणार्थियों में से 200 से कुछ अधिक का बायोमेट्रिक्स अंकन हुआ है।

राज्य के चंफाई जिले, जो म्यांमार से सीधे सटा हुआ है, में सबसे अधिक शरणार्थी रहते हैं, जबकि लॉन्ग्लाे ई जिले में बांग्लादेश के चटग्राम हिल ट्रैक्ट्स से आए बावम समुदाय के लोग मुख्य रूप से शरण लिए हैं। अधिकांश म्यांमार शरणार्थी चिन समुदाय से हैं, जो 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद हिंसा से बचने के लिए भारत पहुंचे। इसी तरह, बांग्लादेश के शरणार्थी 2022 की सैन्य कार्रवाई के बाद आए।
अधिकारियों के मुताबिक धीमेपन की पीछे कई वजहें हैं। हालांकि मुख्य कारण कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी, तकनीकी खामियां और दूरस्थ इलाकों में लॉजिस्टिकल चुनौतियों को बताया गया है। इसके अलावा राहत शिविरों में रहने वाले शरणार्थियों का डेटा आसानी से एकत्र हो रहा है, लेकिन रिश्तेदारों या किराये के घरों में बसे लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। गृहमंत्री के. सपदांगा ने जिला प्रशासनों की सराहना की है, लेकिन कहा कि कोई तय समयसीमा नहीं है—प्रक्रिया तब तक चलेगी जब तक सभी का रजिस्ट्रेशन पूरा न हो।

मिजोरम सरकार ने शरणार्थियों को मानवीय आधार पर सहायता देने का आश्वासन दिया है, लेकिन केंद्र से अधिक फंडिंग और आधिकारिक मान्यता की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर चल रही अस्थिरता के कारण शरणार्थियों की संख्या में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

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