गंगटाड़ी–कुथनौर में देवलांग उत्सव: ढोल-नगाड़ों और रहस्यमयी रीतियों ने खींची भारी भीड़

उत्तरकाशी। रवाई घाटी में श्रद्धा और उमंग के बीच पारंपरिक देवलांग पर्व धूमधाम से मनाया गया। यमुना घाटी के राजकीय गैर बनाल मेला परिसर, गंगटाड़ी और कुथनौर गांवों में शुक्रवार रात आयोजित इस पर्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। यह उत्सव दीपावली के ठीक एक माह बाद मंगसीर बग्वाल के रूप में मनाया जाता है, जिसे घाटी की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान माना जाता है।

रात भर ढोल-नगाड़ों की थाप पर ग्रामीणों ने पारंपरिक हरूल— *“साठियो-पानसायों रात बियाणी, महासू क ओलो न रात बियाणी”* —पर नृत्य करते हुए पुरखों से चली आ रही परंपराओं को निभाया। गैर गांव स्थित राजा रघुनाथ मंदिर परिसर में देवलांग उत्सव के दौरान भारी भीड़ उमड़ी और पूरा क्षेत्र लोकगीतों की गूंज से सराबोर रहा।

आधी रात के बाद देवदार की लकड़ी में आग जलाकर उसे डंडों के सहारे खड़ा किया गया, जिसे देवताओं को प्रसन्न करने की परंपरा माना जाता है। कार्यक्रम में रघुनाथ जी के मुख्य पश्वा सयालिक राम और गैरोला डाडा देवताओं के पश्वा जय कृष्ण गैरोला भी मौजूद रहे। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष प्रदीप गैरोला, पुजारी सियाराम गैरोला सहित कई ग्रामीण सम्मानित लोग उपस्थित थे।

 

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