सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
गुवाहाटी। असम-मेघालय सीमा पर गुरुवार को धान कटाई को लेकर हुई हिंसक झड़प के बाद अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होते दिख रहे हैं। एक युवक की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटना के बाद दोनों राज्यों के प्रशासन ने तुरंत नाइट कर्फ्यू लागू कर स्थिति को नियंत्रण में लिया।
तनाव घटा, लेकिन निगरानी जारी
मेघालय के वेस्ट जयंतिया हिल्स जिले के *लपांगाप गांव* और असम के *वेस्ट कार्बी आंगलोंग* के *तापाट क्षेत्र* में शुक्रवार को भी शाम 6 बजे से सुबह 5 बजे तक नाइट कर्फ्यू जारी रहा। दोनों राज्यों की पुलिस ने सीमा क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अब स्थिति नियंत्रण में है और किसी भी तरह की घातक हथियारों के प्रयोग की पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री संगमा की अपील
मेघालय के मुख्यमंत्री **कोनराड के. संगमा** ने शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि लपांगाप क्षेत्र दोनों राज्यों के बीच *संवेदनशील सीमा बिंदु* है। उन्होंने कहा, “हम असम सरकार के साथ निरंतर संवाद में हैं और समस्या का स्थायी समाधान खोजने का प्रयास जारी है। हिंसा किसी भी समस्या का हल नहीं है। ग्रामीणों से सहयोग की अपेक्षा है ताकि प्रशासन शीघ्र समाधान निकाल सके।”
प्रशासनिक कार्रवाई और जांच
मेघालय सरकार ने *वेस्ट जयंतिया हिल्स* की क्षेत्रीय समिति को लपांगाप गांव का दौरा करने और असम के अधिकारियों के साथ संयुक्त जांच करने के निर्देश दिए हैं। समिति सीमा विवाद के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक रिपोर्ट तैयार करेगी।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
एक्स (पूर्व ट्विटर) पर *डूर्डर्शन न्यूज मेघालय* और *सेंटिनल असम* जैसे स्थानीय मीडिया संगठनों ने बताया कि हिंसा के दौरान किसी भी प्रकार की गोलीबारी नहीं हुई। वहीं, 6 अक्टूबर को हुई शांति समिति की बैठक में कृषि गतिविधियों को रोकने का निर्णय लिया गया था, लेकिन उसके तीन दिन बाद ही यह हिंसा भड़क उठी।
पृष्ठभूमि
लपांगाप-तापाट क्षेत्र को *ब्लॉक-II* में रखा गया है, जो लंबे समय से भूमि और संसाधनों के अधिकार को लेकर विवादित रहा है। 2022 में असम और मेघालय के बीच सीमा विवाद के छह क्षेत्रों पर समझौता हुआ था, लेकिन कई इलाकों का निपटारा अभी बाकी है। जुलाई 2025 में इसी क्षेत्र में आगजनी की घटना के बाद भी तनाव बढ़ा था।
फिलहाल दोनों राज्यों के अधिकारी और पुलिस बल स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि बातचीत और आपसी समझ से ही इस पुराने विवाद का स्थायी समाधान संभव है।