राजाजी टाइगर रिजर्व और लक्ष्य सोसाइटी की संयुक्त पहल — वाइल्डलाइफ संरक्षण पर शिक्षकों ने साझा किए विचार

देहरादून। राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह 2025 के उपलक्ष्य में राजाजी टाइगर रिजर्व और वन विभाग उत्तराखंड के तत्वाधान में लक्ष्य सोसाइटी द्वारा शिक्षकों के लिए एक विशेष ऑनलाइन वाइल्डलाइफ कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य शिक्षकों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना और छात्रों में संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए उन्हें प्रेरित करना था।

कार्यशाला का आयोजन मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (भा.व.से.) रंजन कुमार मिश्र तथा राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक (भा.व.से.) डॉ. कोको रोसे के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में देशभर से शिक्षकों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया और वन्यजीव संरक्षण पर उपयोगी जानकारी प्राप्त की।

इस अवसर पर डॉ. दुर्गेश पंत, महानिदेशक यू-कॉस्ट, और डॉ. साकेत बडोला (भा.व.से.), निदेशक कार्बेट टाइगर रिजर्व, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
डॉ. पंत ने अपने संबोधन में कहा कि “हमें वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील होकर उन्हें इस पृथ्वी पर अपने साथी की तरह देखना चाहिए। मानव और वन्यजीव के बीच सामंजस्य ही प्रकृति के संतुलन की कुंजी है।”

डॉ. बडोला ने राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि “वन्यजीव संरक्षण एक निरंतर प्रक्रिया है, जो केवल एक सप्ताह तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।” उन्होंने बताया कि उत्तराखंड सरकार और वन विभाग के संयुक्त प्रयासों से कार्बेट टाइगर रिजर्व आज देश का सबसे अधिक बाघ संरक्षण क्षेत्र बन गया है।

कार्यशाला में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वन्यजीव विशेषज्ञ पंकज जोशी ने “मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व” पर विस्तार से जानकारी दी और समुदाय आधारित संरक्षण के व्यावहारिक उपायों पर चर्चा की।

लक्ष्य सोसाइटी की सचिव मिनाक्षी असवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए धन्यवाद ज्ञापन दिया।
इस ऑनलाइन कार्यशाला में राज्यभर से लगभग 198 शिक्षकों ने वर्चुअल रूप से भाग लिया।
सत्र में अजय लिंगवाल, डॉ. राजेन्द्र राणा (वैज्ञानिक, यू-कॉस्ट) सहित कई वरिष्ठ विशेषज्ञ भी शामिल रहे।

कार्यशाला के अंत में यह संदेश दिया गया कि शिक्षकों की भूमिका वन्यजीव संरक्षण के प्रति अगली पीढ़ी को जागरूक बनाने में सबसे महत्वपूर्ण है।

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