हंगरी-शेल गैस डील: 10 साल का सबसे बड़ा पश्चिमी समझौता

बुडापेस्ट। रूस से ऊर्जा आपूर्ति पर अत्यधिक निर्भर हंगरी ने ब्रिटेन की ऊर्जा कंपनी शेल के साथ 10 साल का नया गैस आपूर्ति समझौता किया है। हालांकि हंगरी ने साफ किया है कि यह कदम रूस से दूरी बनाने या रूसी गैस पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से नहीं है।

विदेश मंत्री पीटर सिज्जार्टो ने इटली के मिलान में आयोजित एक गैस सम्मेलन के दौरान बताया कि यह हंगरी का किसी पश्चिमी साझेदार के साथ अब तक का सबसे लंबी अवधि और सबसे बड़ी मात्रा का अनुबंध है। इस समझौते के तहत 2026 से शुरू होकर अगले 10 वर्षों तक शेल हंगरी को कुल 2 अरब घनमीटर गैस उपलब्ध कराएगा।

हंगरी पहले से ही 2021 से 2027 तक शेल से सालाना 250 मिलियन घनमीटर गैस आपूर्ति के अनुबंध पर काम कर रहा है। नया समझौता उस अनुबंध से अलग है और इसका उद्देश्य गैस आपूर्ति के स्रोतों को विविध बनाना है।

सिज्जार्टो ने कहा, “हमारे लिए डाइवर्सिफिकेशन का मतलब मौजूदा स्रोतों और मार्गों को छोड़ना नहीं है, बल्कि नए स्रोत और मार्ग जोड़ना है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस से आयातित गैस की आपूर्ति इस नए सौदे से प्रभावित नहीं होगी।

गौरतलब है कि हंगरी ने रूस की ऊर्जा कंपनी गज़प्रोम के साथ पहले ही 15 साल का अनुबंध कर रखा है। इस अनुबंध के तहत रूस से 2036 तक सालाना 4.5 अरब घनमीटर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित है। हाल के वर्षों में हंगरी ने इस अनुबंध के तहत अतिरिक्त आपूर्ति के लिए भी अलग से समझौते किए हैं।

हंगरी की अधिकांश गैस आपूर्ति रूस से टर्कस्ट्रीम पाइपलाइन और इसकी बाल्कन स्ट्रीम विस्तार परियोजना के माध्यम से बुल्गारिया और सर्बिया होकर आती है। यही कारण है कि हंगरी लगातार यूरोपीय संघ की उस योजना का विरोध करता रहा है जिसमें रूसी जीवाश्म ईंधन आयात को पूरी तरह समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया था।

 

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